Himachal Se: Bijnor news: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में इन दिनों गंगा नदी के बीचोंबीच दर्जनों ट्रैक्टर और भारीभरकम ड्रेजर मशीनें काम करती दिखाई दे रही हैं. चौधरी चरण सिंह मध्य गंगा बैराज के अपस्ट्रीम क्षेत्र में नदी के बीच चल रही इस गतिविधि को देखकर लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर गंगा की धारा के बीच यह काम क्यों किया जा रहा है. हालांकि यह कोई अवैध खनन नहीं, बल्कि बिजनौर को हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा शुरू किया गया एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है.

बिजनौर के 50 गांवों में नहीं आएगी बाढ़! गंगा के बीच बन रहा 7.5 KM लंबा चैनल, टूटने से कैसे बचेंगे तटबंध?​
बिजनौर के 50 गांवों में नहीं आएगी बाढ़! गंगा के बीच बन रहा 7.5 KM लंबा चैनल, टूटने से कैसे बचेंगे तटबंध?​

मानसून से पहले उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग गंगा नदी के भीतर करीब 7.5 किलोमीटर लंबा पायलट चैनल, जिसे तकनीकी भाषा में क्यूनेट कहा जाता है, तैयार कर रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य गंगा की मुख्य धारा को एक निश्चित दिशा देना और बाढ़ के दौरान पानी के दबाव को नियंत्रित करना है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से बहकर आने वाली गंगा अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी और गाद लेकर आती है. पिछले कई वर्षों से यह गाद बिजनौर बैराज के ऊपरी हिस्से में जमा होती रही है. लगातार सिल्ट जमा होने के कारण नदी के बीच कई बड़े रेतीले टापू बन गए हैं, जिन्होंने गंगा की प्राकृतिक जलधारा को बाधित कर दिया है.

हर साल बना रहता है बाढ़ का खतरा

स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब मानसून के दौरान पहाड़ों में भारी बारिश होती है. उस समय कई सहायक नदियां भी गंगा में मिलती हैं, जिससे जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है. नदी के बीच बने सिल्ट के टापू पानी के प्रवाह में अवरोध पैदा करते हैं और जलधारा अपना रास्ता बदल लेती है. इसका सीधा असर नदी किनारे बसे गांवों, खेतों और रावली तटबंध पर पड़ता है. तेज जलप्रवाह के कारण भूमि कटान बढ़ जाता है और कई क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो जाता है.

क्या होता है क्यूनेट?

सिंचाई विभाग के मैकेनिकल डिवीजन कानपुर के अधिशासी अभियंता प्रणव सिंह के अनुसार, क्यूनेट एक कृत्रिम जलमार्ग होता है जिसे नदी में जमा गाद को हटाकर बनाया जाता है. बिजनौर में तैयार किए जा रहे इस पायलट चैनल की गहराई लगभग तीन मीटर, चौड़ाई 60 मीटर और लंबाई 7.5 किलोमीटर है. इसका निर्माण इस प्रकार किया जा रहा है कि गंगा की मुख्य धारा इसी मार्ग से होकर बहे.

कितना आएगा खर्च?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब नदी का पानी इस चैनल से गुजरना शुरू करेगा तो उसका प्रवाह स्वयं चैनल को और चौड़ा तथा गहरा करता जाएगा. इससे पानी का दबाव तटबंधों पर कम होगा और बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी. परियोजना पर लगभग 23.5 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है.

बिजनौर जिला हर वर्ष बाढ़ की समस्या से जूझता है. गंगा के बढ़ते जलस्तर से लगभग 40 से 50 गांव प्रभावित होते हैं और हजारों हेक्टेयर में खड़ी गन्ना, धान तथा अन्य फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो जाती हैं. इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए भाजपा नेता ऐश्वर्य मौसम चौधरी और बिजनौर सदर विधायक सुचि मौसम चौधरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से बाढ़ सुरक्षा कार्यों की मांग की थी.

60 ट्रैक्टर और तीन ड्रेजर मशीनें लगातार काम कर रहीं

इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने इस मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी. विभाग के प्रमुख अभियंता अशोक कुमार सिंह के अनुसार, परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए तीन ड्रेजर मशीनें, 60 सिल्ट एक्सावेटर और करीब 60 ट्रैक्टर लगाए गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि चैनल बनने के बाद गंगा की धारा सीधे बैराज के गेटों तक पहुंचेगी और पानी का निकास सुचारु रूप से हो सकेगा. इससे रावली, ब्रह्मपुरी, जीवनपुरी, नवलपुर, सीमली, सीमला, कुंदनपुर, गौसपुर, रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला, फतेहपुर सफाचंद सहित कई गांवों को बाढ़ और कटान के खतरे से राहत मिलने की उम्मीद है.