हरियाणा के 2022 कानून और हार्डकोर कैदी की कानूनी परिभाषा ने कैसे राम रहीम के लिए बार-बार पैरोल का रास्ता खोला, जानिए पूरा मामला.

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh को बार-बार मिलने वाली पैरोल और फरलो हर बार राजनीतिक बहस का मुद्दा बन जाती है. 2017 में साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा मिलने के बाद भी राम रहीम अब तक करीब 16 बार जेल से बाहर आ चुका है और 400 से ज्यादा दिन जेल के बाहर बिता चुका है. सवाल यह उठता है कि हत्या और बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद उसे इतनी राहत कैसे मिल जाती है? इसकी सबसे बड़ी वजह हरियाणा सरकार का 2022 में लाया गया ‘हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्पररी रिलीज) एक्ट’ को माना जाता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी कानून और ‘हार्डकोर कैदी’ की कानूनी परिभाषा की वजह से राम रहीम को पैरोल और फरलो मिलने का रास्ता खुला.
क्या है हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्पररी रिलीज) एक्ट?
हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्पररी रिलीज) एक्ट 2022 में ‘हार्डकोर दोषी कैदी’ की परिभाषा तय की गई है. इस कानून के अनुसार, ऐसा कैदी जिसे सीरियल किलिंग, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, सामूहिक बलात्कार, नाबालिग से रेप, हत्या के साथ यौन अपराध या अन्य बेहद गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया हो, उसे हार्डकोर कैदी माना जाएगा.
कानून में यह भी कहा गया कि अगर किसी कैदी को आजीवन कारावास या मौत की सजा मिली हो, तो वह तुरंत रेगुलर पैरोल या फरलो का पात्र नहीं होगा. ऐसे कैदियों को सात साल की जेल पूरी करने के बाद ही कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है.
राम रहीम ‘हार्डकोर कैदी’ की श्रेणी में क्यों नहीं आया?
हरियाणा सरकार ने 2022 में एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन से कानूनी राय ली थी. राय में कहा गया कि राम रहीम “हार्डकोर दोषी कैदी” की श्रेणी में नहीं आता. इसकी सबसे बड़ी वजह IPC की धारा 302 और 120-B की व्याख्या बनी.
कानूनी राय में कहा गया कि कानून में “murder simpliciter” यानी सीधे हत्या करने वाले अपराधी की बात की गई है. जबकि राम रहीम को कुछ मामलों में हत्या की साजिश यानी धारा 120-B के तहत दोषी ठहराया गया था. सरकार ने इसी आधार पर माना कि वह हार्डकोर कैदी की श्रेणी में नहीं आता और इसलिए पैरोल व फरलो का पात्र हो सकता है.
हरियाणा का नया कानून पुराने कानून से कितना अलग है?
1988 के पुराने कानून में पैरोल और फरलो के लिए काफी सख्त शर्तें थीं. कैदी को तभी अस्थायी रिहाई मिल सकती थी जब परिवार में मौत, गंभीर बीमारी, शादी या खेती-बाड़ी जैसी मजबूरी हो.
‘हार्डकोर कैदियों’ की श्रेणी को 2012 में एक संशोधन के जरिए शुरू किया गया था. यह संशोधन 1988 में बनाए गए एक पुराने कानून में किया गया था. 1988 के उस कानून में पैरोल या फरलो के लिए काफी सख्त शर्तें रखी गई थीं. उन शर्तों में से एक यह थी कि किसी कैदी की अस्थायी रिहाई पर विचार तभी किया जा सकता था, जब कैदी के परिवार के किसी सदस्य की मौत हो गई हो या वह गंभीर रूप से बीमार हो; या फिर कैदी खुद गंभीर रूप से बीमार हो; या फिर कैदी की अपनी शादी हो (या उसके करीबी खून के रिश्तों में किसी की शादी हो); अथवा खेती-बाड़ी से जुड़े किसी काम के लिए रिहाई की जरूरत हो.
लेकिन 2022 में हरियाणा सरकार नया कानून लेकर आई, जिसमें पैरोल की अलग-अलग रेगुलर, इमरजेंसी और कस्टोडियल पैरोल श्रेणियां बनाई गईं. नए कानून के तहत एक कैदी को साल में कुल 10 हफ्ते तक पैरोल और तीन हफ्ते तक फरलो मिल सकती है. इससे अस्थायी रिहाई का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया.
हार्डकोर कैदियों के लिए क्या नियम हैं?
नए कानून के मुताबिक, कोई हार्डकोर दोषी कैदी जिसे आजीवन कारावास मिला हो, वह सात साल जेल में बिताने के बाद ही रेगुलर या इमरजेंसी पैरोल का पात्र बनता है.
ऐसे कैदियों को केवल बेहद सीमित परिस्थितियों में कस्टोडियल पैरोल दी जा सकती है, जैसे परिवार के किसी सदस्य के अंतिम संस्कार या बच्चों की शादी में शामिल होना. यह पैरोल भी छह घंटे से ज्यादा की नहीं होती.
Gurmeet Ram Rahim Singh को कब-कब मिली पैरोल और फरलो?
राम रहीम को अक्टूबर 2020 में पहली बड़ी राहत मिली, जब उन्हें अपनी मां से मिलने के लिए एक दिन की पैरोल दी गई. मई 2021 में उन्हें 12 घंटे के लिए अस्पताल विजिट की अनुमति मिली. फरवरी 2022 में 21 दिन की फरलो और जून 2022 में 30 दिन की पैरोल दी गई. अक्टूबर 2022 में उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली, जिस पर काफी राजनीतिक विवाद हुआ.
जनवरी 2023 में फिर 40 दिन की पैरोल दी गई और जुलाई 2023 में 30 दिन के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली. नवंबर 2023 में 21 दिन की फरलो दी गई. जनवरी 2024 में उन्हें 50 दिन की पैरोल मिली, जो सबसे लंबी राहतों में से एक थी. अगस्त 2024 में फिर 21 दिन की फरलो दी गई.
साल 2025 में जनवरी में 30 दिन की पैरोल और अप्रैल में 21 दिन की फरलो मिली. इसके बाद जनवरी 2026 में 40 दिन और मई 2026 में 30 दिन की पैरोल मंजूर की गई. 2022 से 2026 के बीच कुछ छोटी अवधि की अस्थायी रिहाइयों को मिलाकर कुल संख्या करीब 16 तक पहुंच चुकी है.
राम रहीम की पैरोल हर बार विवाद में क्यों रहती है?
राम रहीम की रिहाई लगभग हर बार राजनीतिक बहस छेड़ देती है. विपक्षी दल आरोप लगाते रहे हैं कि चुनावी मौसम के आसपास उसे राहत दी जाती है. खासकर पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों में चुनाव से पहले पैरोल मिलने पर सवाल उठते रहे हैं.
सोशल मीडिया पर भी कई बार इसे “VIP Treatment” कहा गया. आलोचकों का कहना है कि गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदी को बार-बार राहत मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है.
अभी कितनी सजा काट रहे हैं राम रहीम?
राम रहीम फिलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा काट रहा है. इसके अलावा पत्रकार हत्या और डेरा मैनेजर रंजीत सिंह हत्या साजिश मामले में भी उसे दोषी ठहराया जा चुका है. इन मामलों में उसे आगे आजीवन कारावास की सजा भी भुगतनी है.



