Ayodhya Ram Mandir SIT Investigation: अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और चंदे में हेराफेरी के मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी कार्रवाई बेहद तेज कर दी है। इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच की आंच अब राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय तक पहुंच गई है। एसआईटी की टीम ने इस मामले में चंपत राय को घेरते हुए उनसे घंटों तक गहन पूछताछ की है।

घंटों पूछताछ के बाद कई अहम दस्तावेज जब्त
एसआईटी के अधिकारियों ने से लंबी पूछताछ करने के बाद उनके पास से कई बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। चंपत राय से सवालजवाब करने के बाद जांच टीम ने विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री गोपाल राव से भी अगले चरण की पूछताछ पूरी की है। हालांकि, इससे पहले गोपाल राव को जांच से पूरी तरह अलग रखा गया था।
सोनेचांदी और अष्टधातु की 1250 शिलाएं गायब
इस पूरे मामले में धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि साल 1989 में देशविदेश और गांवगांव से पूजित होकर अयोध्या आई सोने, चांदी, हीरेमाणिक्य और अष्टधातु की करीब 1250 बेशकीमती श्रीराम शिलाएं अब कारसेवकपुरम से गायब हो चुकी हैं।
तीन तालों के भीतर रखी शिलाओं का नहीं मिल रहा सुराग
संतोष दुबे के अनुसार, ये सभी पवित्र धातु की शिलाएं साल 2002 तक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की सीधी देखरेख में कारसेवकपुरम में सुरक्षित रखी गई थीं। वहाँ आज भी मिट्टी की पूजित शिलाएं तो सुरक्षित रखी हुई हैं, लेकिन कीमती धातुओं वाली शिलाएं गायब हैं। हैरानी की बात यह है कि ये शिलाएं जहां रखी गई थीं, वहां तीन मजबूत ताले लगे हुए थे।
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शुरुआती जांच में सामने आए कई बड़े नाम, रिपोर्ट तैयार
एसआईटी की इस शुरुआती जांच में ही से जुड़े कई रसूखदार और बड़े नामों के चंदा चोरी के खेल में लिप्त होने के पुख्ता संकेत मिले हैं। जांच के पहले दिन जब्त किए गए दस्तावेजों के आधार पर अब टीम अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। एसआईटी के अधिकारी जल्द ही अपनी इस प्रारंभिक रिपोर्ट को शासन के समक्ष सौंपने की तैयारी में जुट गए हैं।



