Himachal Se: 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Karen: सनातन धर्म में सोलह सोमवार का व्रत बड़ा महत्व बताया गया है। शिवपुराण में सोलह सोमवार व्रत की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सोलह सोमवार का व्रत दांपत्‍य जीवन की खुशहाली के लिए और मनपसंद जीवनसाथी पाने के लिए रखा जाता है।सावन 2026 में सोलह सोमवार व्रत शुरू करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

16 Somvar Vrat 2026: 16 सोमवार व्रत कब करें शुरू? क्या है इसकी महिमा? यहां जानिए विधि​
16 Somvar Vrat 2026: 16 सोमवार व्रत कब करें शुरू? क्या है इसकी महिमा? यहां जानिए विधि​

इस साल 30 जुलाई से सावन माह शुरु हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार सोमवार व्रत करने के लिए सावन माह सर्वोत्तम समय बताया गया है।

पौराणिक मान्‍यताओं में बताया गया है कि का व्रत रखने का आरंभ सबसे पहले मां पार्वती ने स्‍वयं किया था और उनकी कड़ी तपस्‍या और व्रत के शुभ प्रभाव की वजह से उन्‍हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्‍त हुए थे। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस व्रत को करने के फायदे और व्रत की विधि।

कब से शुरू होगा सावन?

पंचांग के अनुसार, इस साल सावन के महीने की शुरुआत 30 जुलाई को सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी। जबकि सावन माह का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा।

सोलह सोमवार के व्रत की पूजा सामग्री

सोलह सोमवार के व्रत के लिए शिवजी की मूर्ति, भांग, बेलपत्र, जल, धूप, दीप, गंगाजल, धतूरा, इत्र, सफेद चंदन, रोली, अष्टगंध, सफेद वस्त्र, नैवेद्य जिसे आधा सेर गेहूं के आटे को घी में भूनकर गुड़ मिलाकर बना लें।

कैसे करें सोलह सोमवार व्रत करने का संकल्‍प

किसी भी पूजा या व्रत को आरम्भ करने के लिये सर्व प्रथम संकल्प करना चाहिए। व्रत के पहले दिन संकल्प किया जाता है। उसके बाद आप नियमित पूजा और व्रत करें। सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत, पान का पत्ता, सुपारी और कुछ सिक्के लेकर संकल्प करें। सभी वस्‍तुएं की मूर्ति के आगे समर्पित कर दें।

16 सोमवार व्रत के क्या है नियम?

सोमवार व्रत करने के लिए सावन माह सर्वोत्तम समय बताया गया है। सावन माह के पहले सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

फिर मंदिर या घर के पूजा स्थान पर जाकर हाथ में जल, फूल या चावल लेकर 16 सोमवार व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव का कच्चे दूध और गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, सफेद फूल, भांग, धतूरा और बेलपत्र चढ़ाएं।

पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। सोलह सोमवार की व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें। अंत में आरती करें। व्रत में तामसिक चीजों से दूरी बनाएं. वादविवाद से दूर रहें. मन में बुरे विचार न लाएं. किसी का अपमान न करें।