Himachal Se: मातापिता की देखभाल को लेकर दुनिया के कई देशों में सख्त नियम हैं. चीन हो या जापान, यहां के कानून में मातापिता की देखभाल के लिए खास प्रावधान बनाए गए हैं. 2013 में बनाया गया चीन का नियम कहता है कि बच्चा वयस्क हो चुका है तो उसे अपने बुजुर्ग मातापिता से नियमित मिलना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता तो मातापिता अदालत में इसकी शिकायत कर सकते हैं.

माता-पिता से न मिलने पर भी जुर्माना…पेरेंट्स की देखभाल पर कहां-कितने सख्त कानून?​
माता-पिता से न मिलने पर भी जुर्माना…पेरेंट्स की देखभाल पर कहां-कितने सख्त कानून?​

इस कानून का मकसद है कि बच्चे मातापिता की भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखें. यही नहीं दूसरे देशों में भी ऐसे कानून हैं जिसमें मातापिता को आर्थिक मदद देने के साथ उनसे नियमित तौर पर मिलने का प्रावधान तय किया है.

जापान और सिंगापुर में कैसा है नियम?

चीन के मुकाबले जापान में नियमों में सख्ती कम है. यहां परिवार पर बुजुर्गों की देखभाल की नैतिक जिम्मेदारी है, जापान का सिविल कानून कहता है कि परिवार के सदस्यों पर जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता का दायित्व बढ़ सकता है. यहां बुजुर्गों की देखभाल के लिए सरकार ने लॉन्ग टर्म केयर इंश्योरेंस सिस्टम तैयार किया है. इसलिए कानूनी दबाव की बजाय सामाजिक और सरकारी सहायता पर अधिक जोर है.

मातापिता की देखभाल का मतलब सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं है. फोटो: Pexels

माता की देखभाल के मामले में सिंगापुर सख्त है. यहां मेंटिनेंस ऑफ पेरेंट्स एक्ट कहता है कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के मातापिता अपने बच्चों से आर्थिक सहायता मांग सकते हैं. यदि बच्चे सहायता नहीं करते तो मामला विशेष न्यायाधिकरण तक जा सकता है. अदालत बच्चों को नियमित भुगतान का आदेश दे सकती है.

सिंगापुर का कानून भी सख्त है. फोटो: Pexels

भारत में कैसा है कानून?

भारत में मातापिता की देखभाल के लिए मेंटिनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजंस 2007 है. इसे बुजुर्ग मातापिता और वरिष्ठ नागरिकों की आर्थिक, सामाजिक और कानूनी सुरक्षा के लिए बनाया गया. कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करता है कि बच्चे या कानूनी उत्तराधिकारी अपने मातापिता को बेसहारा न छोड़ें.

कानून कहता है कि यदि मातापिता या 60 वर्ष से अधिक आयु का कोई वरिष्ठ नागरिक अपनी आय या संपत्ति से अपना गुजारा नहीं कर सकता, तो वह अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरणपोषण की मांग कर सकता है.

इस कानून के लिए जिम्मेदारी भी तय की गई है. कानून में नाबालिग को छोड़कर “बच्चों” में बेटा, बेटी, पोता और पोती शामिल हैं. कानून कहता है, भरणपाेषण का मतलब सिर्फ पैसा नहीं है. इसमें भोजन, कपड़े, रहने की व्यवस्था, चिकित्सा और इलाज जैसी मूलभूत जरूरतें शामिल हैं.

भारत में मातापिता की देखभाल के लिए कानून है. फोटो: Pexels

1 जून को क्यों मनाते हैं यह खास दिन?

ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स हर साल 1 जून को मनाया जाता है. यह 1 जून को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने साल 2012 में एक प्रस्ताव पारित कर 1 जून को ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स घोषित किया था. इसके बाद से दुनियाभर में यह दिवस 1 जून को मनाया जाने लगा. इस खास दिन को मनाए जाने का मकसद मातापिता के निस्वार्थ प्रेम और समर्पण को सम्मान देना है. इसके साथ ही समाज में बुजुर्ग मातापिता के प्रति सम्मान और देखभाल को बढ़ावा देना है.

भारत के लिए इसका महत्व और भी ज्यादा है क्योंकि यहां मातापिता को विशेष सम्मान देने की परंपरा रही है. “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः” का संदेश मातापिता को देवतुल्य मानने की सीख देता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसी भावना के कारण भारत के लिए यह दिन और खास हो जाता है.