मेमोरी चिप की कॉस्ट बढ़ने के कारण, Apple ने भारत समेत दुनिया भर में MacBook और iPad मॉडल की शुरुआती कीमतों में 20% से 42% तक की बढ़ोतरी की है. Apple India की वेबसाइट पर नई प्राइस लिस्ट से पता चलता है कि कंपनी ने M5 सीरीज चिप वाले MacBook Pro की कीमत में लगभग 20% की बढ़ोतरी की है. M5 Pro चिप वाले 14इंच MacBook Pro की कीमत 2,49,900 रुपए प्रति यूनिट से बढ़ाकर 2,99,900 रुपए प्रति यूनिट कर दी गई है. iPad Air की कीमत में भी भारी बढ़ोतरी हुई है. 13इंच iPad Air के बेसिक मॉडल की कीमत 84,900 रुपए प्रति यूनिट से 41.22 फीसदी बढ़कर 1,19,900 रुपये प्रति यूनिट हो गई है.

क्यों बढ़ाने पर प्रोडक्ट्स के दाम?
काउंटरप्वाइंट रिसर्च के कोफाउंडर और रिसर्च के वीपी, नील शाह ने कहा कि MacBook Neo, MacBook Air, MacBook Pro, iPad Air और iPad Pro WiFi के लिए Apple की कीमतों में बढ़ोतरी, कंज्यूमर और एंटरप्राइज PC और टैबलेट मार्केट के कॉस्ट स्ट्रक्चर में आए बड़े बदलाव का नतीजा है. यह बदलाव मेमोरी से लेकर प्रोसेसर तक सेमीकंडक्टर चिप की बढ़ती कीमतों की वजह से हो रहा है. Apple ने एक बयान में कहा कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना कर रही है.
बयान में कहा गया कि AI डाटा सेंटरों के तेजी से विस्तार ने मेमोरी और स्टोरेज की मांग में असाधारण उछाल पैदा किया है. हमने पहले कभी किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी तेज़ी से और इतनी ज़्यादा बढ़ोतरी नहीं देखी है. हमने अब तक अपने ग्राहकों को इन बढ़ोत्तरी से बचाकर रखा है, लेकिन अब हम ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हमें कई प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं, जिसमें आज iPad और Mac के लिए की गई बढ़ोतरी भी शामिल है. हम जानते हैं कि यह अच्छी खबर नहीं है, और हम समाधान खोजने के लिए लगातार काम कर रहे हैं.
चिप कंपनियों के मार्जिन में इजाफा
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए कीमतों में बढ़ोतरी पूरी इंडस्ट्री में आम बात हो गई है, और कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में 40 फीसदी या उससे ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है. मेमोरी कंपनियां अपने प्रोडक्शन का एक बड़ा हिस्सा AI डेटा सेंटरों को दे रही हैं, जिससे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में सप्लाई कम हो रही है और कॉस्ट बढ़ रही है. मेमोरी सप्लायर्स का मार्जिन ऐतिहासिक रूप से हाई लेवल पर पहुंच गया है.
मेमोरी चिप बनाने वाली प्रमुख कंपनी माइक्रोन ने 86 फीसदी ग्रॉस मार्जिन की जानकारी दी है, जो पिछले साल सिर्फ 15 फीसदी था. साइबरमीडिया रिसर्च के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के VP प्रभु राम ने कहा कि एप्पल को लंबे समय से सप्लाई चेन की मज़बूती के मामले में इंडस्ट्री का बेंचमार्क माना जाता रहा है, लेकिन अब उसने कंपोनेंट की बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर दिया है. यह इस बात का मज़बूत संकेत है कि कीमतों का दबाव उस स्तर पर पहुँच गया है जिसे सबसे बेहतर तरीके से लागत को खुद झेलने की रणनीतियाँ भी पूरी तरह से बेअसर नहीं कर सकतीं.
एआई इंफ्रा में चिप की सप्लाई ज्यादा
शाह ने कहा कि Apple ने कम से कम दो तिमाहियों तक कीमतों में बढ़ोतरी को रोके रखा और अपने यूजर्स को महंगाई के असर से बचाया, लेकिन अब यह स्थिति उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां कंपनी कॉस्ट में हुई बढ़ोतरी को खुद नहीं झेल सकता. उन्होंने कहा कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बढ़ोतरी ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को बदल दिया है. इससे DRAM, NAND और कंप्यूट चिप्स की जबरदस्त मांग पैदा हुई है.
लेकिन AI इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दिए जाने के कारण अन्य बाज़ारों में प्रोडक्शन और सप्लाई की क्षमता इसके बराबर नहीं हो पा रही है. हमारा मानना है कि कम से कम अगले दो सालों तक स्थिति बेहतर नहीं होने वाली है. शाह ने कहा कि कीमत बढ़ाने का समय सही नहीं है क्योंकि Apple इस साल के आखिर में अपने नए ‘ऑनडिवाइस Apple इंटेलिजेंस’ को कई डिवाइस पर लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके लिए ज्यादा मेमोरी और कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होगी.
क्या पड़ेगा मांग पर असर?
शाह ने कहा कि इससे आने वाले महीनों में Apple के प्रोडक्ट्स की कुल मांग पर असर पड़ सकता है. हालांकि, यह Apple के लिए सकारात्मक भी हो सकता है, खासकर उन ग्राहकों के लिए जिन्हें अपने डिवाइस को अपडेट करना है और वे नया Mac या iPad खरीदना चाहते हैं और खरीदारी में देरी नहीं कर सकते. वे कम कॉन्फ़िगरेशन वाले डिवाइस के लिए ज्यादा पैसे देकर समझौता नहीं करेंगे, बल्कि Apple के पोर्टफोलियो से ज्यादा प्रीमियम वर्जन खरीदेंगे. इसलिए, बाजार प्रीमियम सेगमेंट की ओर बढ़ सकता है क्योंकि यूजर्स अपने खर्च किए गए पैसे का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहते हैं.


