Himachal Se: Adhik Maas Jyeshtha Purnima 2026: इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है, जो कि 3 साल में एक बार आता है। अधिक मास को पुरुषोत्तम माह के रूप में भी जाना जाता है। इस माह के स्वामी स्वयं जगत के पालनहार नारायण है। इस वजह से अधिक मास में आने वाली ज्येष्ठ पूर्णिमा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिक मास में आने की वजह से इस पूर्णिमा को अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा कहेंगे। भगवान विष्णु को समर्पित इस विशेष महीने की पूर्णिमा पर स्नान, दान और पूजा करने से सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं कि ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा कब मनाई जाएगी और स्नानदान का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन 31 मई को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 31 मई 2026 को रहेगी। पूर्णिमा का स्नान भी इसी दिन किया जाएगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जो लोग पूर्णिमा का उपवास रखते हैं वे शनिवार को पूर्णिमा का व्रत रखेंगे। उदयातिथि के अनुसार गंगा स्नान, दानपुण्य और सत्यनारायण भगवान की कथा रविवार को करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 स्नानदान मुहूर्त
अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान के लिए सुबह से लेकर दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक का समय उत्तम रहेगा। लेकिन इसके अलावा जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नानदान करना चाहते हैं उनके लिए सुबह 4 बजकर 34 मिनट से सुबह 5 बजकर 17 मिनट तक का समय मिलेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से आरंभ होगा और समाप्त दोपहर 1 बजकर 3 मिनट पर होगा। ये मुहूर्त भी स्नानदान के लिए अच्छा माना जाता है।
क्यों इतनी खास है ज्येष्ठ पूर्णिमा
अधिक मास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस बार की ज्येष्ठ पूर्णिमा अत्यंत खास मानी जा रही है। इस बार ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है, इसलिए इसे अधिक ज्येष्ठ माह कहा जा रहा है। अधिक मास और पूर्णिमा दोनों में भगवान विष्णु की पूजा का खास महत्व है। पूर्णिमा के दिन नारायण के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं।



