Himachal Se: Bhopal Twisha Sharma Case: भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार देर रात एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने रसूख और रसूखदारों के कानूनी दांवपेचों को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए ट्विशा की सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया. यह जमानत उन्हें भोपाल की निचली अदालत ने FIR दर्ज होने के चंद घंटों के भीतर ही दे दी थी.

ताश के पत्तों की तरह बिखरीं सारी दलीलें… ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत? ये हैं 5 बड़ी वजहें​
ताश के पत्तों की तरह बिखरीं सारी दलीलें… ट्विशा शर्मा केस में हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत? ये हैं 5 बड़ी वजहें​

CBI की कस्टडी, पूर्व जज की फॉरेंसिक ट्रेनिंग और WhatsApp के खौफनाक चैट्स के बीच उलझी इस कहानी में हाईकोर्ट ने साफ किया कि कानून सबके लिए बराबर है. आइए जानते हैं कि बचाव पक्ष ने खुद को बचाने के लिए अदालत में क्याक्या दलीलें दीं और क्यों वे सभी दावे ताश के पत्तों की तरह बिखर गए.

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने गिरिबाला सिंह को जेल जाने से बचाने के लिए अदालत के सामने कई तर्क रखे, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया:

दलील 1: “चैट्स में सिर्फ पति पर आरोप हैं, सास पर नहीं”

बचाव पक्ष का दावा: ट्विशा की व्हाट्सऐप चैट्स में दहेज प्रताड़ना के जो भी आरोप हैं, वे मुख्य रूप से उसके पति समर्थ सिंह के खिलाफ हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ट्विशा ने अपनी सास के लिए चैट्स में लिखा था कि अम्मा एक अच्छी इंसान हैं.

कोर्ट: जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने आदेश में कहा कि WhatsApp चैट्स को देखने से यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ पति पर हैं. ट्रायल कोर्ट ने इन तथ्यों और गवाहों के बयानों को पूरी गंभीरता से नहीं देखा.

दलील 2: “हमने तो बहू के खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे”

बचाव पक्ष का दावा: गिरिबाला सिंह अपनी बहू का ख्याल रखती थीं और उन्होंने यूपीआई के जरिए ट्विशा के खाते में 7 लाख रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए थे. ऐसे में दहेज की मांग का आरोप गलत है.

कोर्ट: हाईकोर्ट ने बैंक रिकॉर्ड खंगाला और पाया कि शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी. पैसों का लेनदेन अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुआ था. मौत के आसपास कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस लेनदेन से यह नहीं माना जा सकता कि दहेज की मांग नहीं हो रही थी.

दलील 3: “ट्विशा खुद गर्भपात कराना चाहती थी”

बचाव पक्ष का दावा: शादी के दो महीने के भीतर ही ट्विशा का गर्भपात हुआ था, लेकिन इसके लिए उस पर कोई दबाव नहीं था, बल्कि वह खुद ऐसा चाहती थी.

कोर्ट: कोर्ट ने कहा कि व्हाट्सऐप चैट्स और मृतका के परिजनों के बयानों से साफ है कि गर्भधारण और उसके समाप्त होने को लेकर दोनों पक्षों में गंभीर विवाद था. मृतका पर जबरन गर्भपात का दबाव बनाया जा रहा था.

दलील 4: “63 साल की बुजुर्ग महिला के भागने का कोई खतरा नहीं”

बचाव पक्ष का दावा: गिरिबाला सिंह एक 63 वर्षीय बुजुर्ग महिला हैं, भोपाल की स्थायी निवासी हैं और रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं. उनके कहीं भागने या छिपने की कोई संभावना नहीं है.

कोर्ट: कोर्ट ने कहा कि केवल उम्र और रसूख के आधार पर ऐसे संगीन मामले में अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती.

पोस्टमार्टम के वो ‘6 निशान’ जिन्होंने पलट दिया पूरा केस

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतका ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम और एम्स की क्वेरी रिपोर्ट सामने आई. एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वैसे तो मौत की वजह फंदे पर लटकना बताई गई थी, लेकिन ट्विशा के शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान भी मिले थे. इनमें चार चोटें बाएं हाथ पर, एक रिंग फिंगर पर और एक सिर पर थी. ये सभी चोटें मौत से ठीक पहले की थीं.

गिरिबाला के वकीलों ने तर्क दिया था कि जब ट्विशा को फंदे से उतारा गया और अस्पताल ले जाया गया, तो शायद ये चोटें तब लगी होंगी. लेकिन एम्स की स्पेशल रिपोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ये चोटें शव को फंदे से उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं. यानी मौत से पहले ट्विशा के साथ मारपीट की गई थी.

“पुलिस के साथ खेल रही थीं आंखमिचौली”

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह और CBI ने जमानत का पुरजोर विरोध किया. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद से गिरिबाला सिंह जांच एजेंसी के साथ आंखमिचौली का खेल खेल रही थीं. उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए 5 बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन उन्होंने नोटिस लेने तक से इनकार कर दिया. आखिरकार पुलिस को व्हाट्सऐप पर नोटिस तामील कराना पड़ा.

ट्विशा के पिता के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कोर्ट में दलील दी, “आरोपी कोई आम महिला नहीं हैं. वे पूर्व न्यायिक अधिकारी हैं, उनके पास साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल सिग्नेचर और क्राइम सीन मैनेजमेंट की विशेष ट्रेनिंग है. ऐसे में वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं.”

CBI ने कोर्ट को बताया कि ट्विशा के पति समर्थ सिंह को पहले ही 29 मई तक की कस्टडी में लिया जा चुका है, क्योंकि पोस्टमार्टम के समय कई अनधिकृत लोग मौजूद थे. अब हाईकोर्ट द्वारा सास की जमानत रद्द होने के बाद उनकी गिरफ्तारी और कस्टोडियल इंटेरोगेशन का रास्ता साफ हो गया है.