Himachal Se: भारत में गर्मियों के मौसम में लोग आम का सेवन खूब करते हैं। फलों के राजा आम के कई किस्में है। लंगड़ा, दशहरी से लेकर तोता परी तक जैसे भारतीय आम अपने खास स्वाद और मिठास के लिए जाने जाते हैं। इन आमों की कीमत अधिकतम 200250 रुपये किलो तक जा सकती है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि आम 2.5 से 3 लाख रुपये किलो बिकता है। शायद आपको यह थोड़ा अटपटा लगे, लेकिन आम की एक ऐसी किस्म है जिसकी कीमत 2.5 से 3 लाख रुपये प्रति किलो तक होती है। दरअसल, यह एक जापानी आम है, जिसका नाम मियाजाकी है।

3 लाख रुपये प्रति किलो वाला आम, क्यों इतना महंगा है मियाजाकी आम और जानें इसकी खासियत​
3 लाख रुपये प्रति किलो वाला आम, क्यों इतना महंगा है मियाजाकी आम और जानें इसकी खासियत​

कीमत
मियाजाकी आम दुनिया के सबसे महंगे और प्रीमियम किस्म के आमों में से एक माना जाता है। यह जापान के मियाजाकी प्रांत में मुख्य रूप से उगाया जाता है और इसी शहर के नाम पर इसका भी नाम रखा गया। इसकी कीमत नीलामी में लगभग 3000 डॉलर प्रति किलो से भी अधिक पहुंच जाती है। भारतीय रुपये में ये रकम 2.5 से 3 लाख रुपये के करीब बैठती है। इसका बाहरी रंग गहरा रूबी लाल होता है, जिसकी वजह से इसे ‘एग ऑफ द सन’ भी कहा जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह आम अपनी खास मिठास के लिए जाना जाता है। इसे उगाने का तरीका भी काफी अलग है।

खासियत
मियाजाकी एक खास किस्म का आम है, जिसे बेहद नियंत्रित और वैज्ञानिक तरीके से उगाया जाता है। इसकी खासियत इसका गहरा रूबी लाल रंग, बहुत ज्यादा मिठास और मलाई जैसी बनावट होती है।

क्यों इतना महंगा होता है यह आम
मियाजाकी आम को उगाना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसकी खेती की प्रक्रिया ही इसे इतना महंगा बनाती है। इसकी खेती के लिए कुछ खास मानकों को पूरा करना जरूरी होता है। खेती पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में होती है। हर फल पर खास देखभाल की जाती है। इसे बहुत सीमित मात्रा में उगाया जाता है। हर फल का वजन कम से कम 350 ग्राम होना चाहिए और उसमें कम से कम 15 प्रतिशत शुगर कंटेंट होना जरूरी होता है। इसके अलावा इसकी खेती में लगने वाली सटीक और मेहनत भरी प्रक्रिया भी इसकी कीमत को बढ़ा देती है।


कैसे होती है खेती
मियाजाकी आमों की 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच औसत तापमान और शुरुआती चरण में लगातार नमी की जरूरत होती है। इसके बाद फूल आने के समय गर्म और सूखा मौसम आवश्यक होता है। मियाजाकी आम का समान रूप से लाल रंग इसलिए बनता है क्योंकि फल जब पेड़ पर होते हैं, तब किसान इस पर छोटेछोटे विशेष जाल और मिरर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे फल को हर दिशा से धूप मिल सके। जमीन पर शीशे भी लगाए जाते हैं, ताकि सूर्य की रोशनी फल के नीचे हिस्से तक भी पहुंच सके। इन आमों को हर दिन कम से कम 6 से 8 घंटे धूप मिलनी चाहिए, तभी यह अपने खास गुण विकसित कर पाते हैं। मियाजाकी आम को अधिकतर उपहार के रूप में दिया जाता है। जापान में लोग इसे प्रतिष्ठा और लग्जरी का प्रतीक मानते हैं।

हाथ से नहीं तो कैसे तोड़ते हैं आम
मियाजाकी आम को हाथ से नहीं तोड़ा जाता है। पकने से फल को पेड़ से गिरने दिया जाता है। नीचे जाल लगाए जाते हैं, जिसमें ये आम सुरक्षित रूप से गिरते हैं। इस फल की ऐसे तकनीक के खेती की जाती है कि इसमें रेशे बहुत कम या बिल्कुल न के बराबर होते हैं।

क्या भारत में होती है मियाजाकी आम की खेती
दुनिया के सबसे महंगे और जापान के लग्जरी आम मियाजाकी की खेती अब भारत में भी शुरू हो चुकी है। बिहार के रणविजय कुमार नामक किसान ने तमाम कोशिशों के बाद इसकी खेती करनी शुरू की है। हालांकि, शुरुआत में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़े, लेकिन अब उन्होंने इस लग्जरी आम की खेती को भारत में सफल बना दिया है। भारतीय कृषि में इसे एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।