Himachal Se: भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है. मई महीने में प्रदेश के साथसाथ बाहरी स्रोतों से जुड़े दर्जनों थर्मल पावर प्लांट कईकई दिनों तक बंद रहने के कारण हजारों मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भारी कटौती करनी पड़ी. उपभोक्ताओं का आरोप है कि भारी बिजली बिल वसूलने के बावजूद बिजली व्यवस्था को मजबूत करने में लापरवाही बरती गई.

यूपी में क्यों बिगड़ी बिजली की हालत? अधिकारी ने बताई असली वजह​
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उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि सिस्टम क्षमता में 2 करोड़ किलोवाट से अधिक का मिसमैच, मैनपावर की कमी और संविदा कर्मचारियों की छंटनी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की समीक्षा के बाद उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यह निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन अब देखना यह होगा कि पावर कॉरपोरेशन केवल अपनी उपलब्धियां गिनाता रहेगा या जनता को पसीना बहाने से बचाएगा.

इन प्लांट्स के 23 मई तक बंद रहने से हुआ भारी नुकसान

  • घाटमपुर TPS 660 MW, 18 दिन बंद
  • ललितपुर TPS 660 MW, 11 दिन बंद
  • JSW महानदी 1000 MW, 10 दिन बंद
  • ओबरा बी TPS 200 MW, 9.5 दिन बंद
  • ओबरा C TPS 660 MW, 8 दिन बंद
  • अनपराD TPS 500 MW, 6.5 दिन बंद
  • जवाहरपुर TPS 660 MW, 4 दिन बंद
  • अनपरा TPS 210 MW, 4 दिन बंद
  • लैंको 600 MW, 3 दिन बंद
  • परिछा TPS 250 MW, 3 दिन बंद
  • खुर्जा TPS 660 MW, 1 दिन बंद

इन बंदियों से कुल हजारों मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ. सबसे अधिक मार किसानों, छात्रों, छोटे व्यापारियों और आम घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ी.

अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि बिजली उत्पादन इकाइयों के रखरखाव, कोयला प्रबंधन और सिस्टम क्षमता विस्तार में गंभीर लापरवाही बरती गई. उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारियों की छंटनी और मैनपावर की कमी को कोई छिपा नहीं सकता. वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद सिस्टम में हाहाकार मचा हुआ है.

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने सरकार और बिजली कंपनियों से मांग की है कि बंद पड़ी सभी उत्पादन इकाइयों को तत्काल चालू किया जाए. भविष्य में ऐसे संकट से निपटने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए. सिस्टम क्षमता को मांग के अनुरूप बढ़ाया जाए. रखरखाव और कोयला प्रबंधन को बेहतर बनाया जाए.