Himachal Se: Nirjala Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। इसे पाण्डव एकादशी, भीमसेनी एकादशी या भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं कई लोग इसे जेठ एकादशी भी कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से साल में आने वाली दूसरी सभी एकादशियों का फल एक साथ मिल जाता हैं। कहते हैं जो भी भक्त सभी एकादशी का व्रत रख पाने में सक्षम नहीं हैं उन्हें निर्जला एकादशी का उपवास जरूर रखना चाहिए। बता दें ये एकादशी अपरा एकादशी के बाद पड़ती है और इस साल अपरा एकादशी 13 मई को मनाई जा चुकी है। ऐसे में जानिए अब निर्जला एकादशी कब मनाई जाएगी।

Nirjala Ekadashi 2026: क्या 27 मई को निर्जला एकादशी है? नोट करें ज्येष्ठ महीने की सबसे बड़ी एकादशी की डेट​
Nirjala Ekadashi 2026: क्या 27 मई को निर्जला एकादशी है? नोट करें ज्येष्ठ महीने की सबसे बड़ी एकादशी की डेट​

निर्जला एकादशी कब है 2026

इस साल निर्जला एकादशी 25 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी और 27 मई को पद्मिनी एकादशी रहेगी। दरअसल ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि 17 मई से अधिक मास लग गया है जो 15 जून तक रहेगा। जैसा कि आप जानते हैं कि अधिक मास में पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी मनाई जाती है इसलिए निर्जला एकादशी की डेट एक महीना आगे खिसक गई है।

निर्जला एकादशी मुहूर्त 2026

निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त 25 जून की रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। वहीं पारण समय 26 जून की सुबह 05:25 से 08:13 बजे तक रहेगा।

निर्जला एकादशी की कथा और महत्व

निर्जला एकादशी की कथा पाण्डवों के दूसरे भाई भीमसेन से जुड़ी है जो खानेपीने के अत्यधिक शौकीन थे। जिस कारण वे अपनी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाते थे। इसी कारण से उनके लिए एकादशी व्रत रखना भी काफी मुश्किल हो जाता था। भीम के अलावा उनके अन्य सभी भाई और द्रौपदी साल की सभी एकादशी का व्रत रखा करती थीं। भीमसेन व्रत रखना तो चाहते थे लेकिन उनके लिए बारबार भूखा रहना असंभव प्रतीत होता था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस दुविधा के समाधान के लिए भीमसेन महर्षि व्यास के पास गये, तब महर्षि व्यास ने उन्हें सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी और कहा कि निर्जला एकादशी साल की सभी एकादशियों के तुल्य है। यानी सिर्फ इस एकादशी का व्रत रखने से उन्हें साल की सभी एकादशियों का व्रत प्राप्त हो सकता था। जिसके बाद भीमसेन ने पूरी श्रद्धा से ये व्रत रखना शुरू कर दिया। इसी पौराणिक कथा के बाद निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाने लगा।