Himachal Se: Nautapa 2026 Start and End Date: 25 मई 2026, सोमवार से नौतपा शुरू हो रहा है। आपको बता दें कि नौतपा के दौरान प्रचंड गर्मी पड़ती है। इस समय सूर्य का ताप अपनी चरम सीमा पर रहता है। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो धरती का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है, जिसे नौतपा कहा जाता है। नौतपा पूरे नौ दिनों तक रहता है। 25 मई को सूर्य देव वृषभ राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और अगले 9 दिनों तक इसी स्थिति में रहेंगे। पृथ्वी के सबसे नजदीक होने और सूर्य की किरणें सीधी पड़ने के कारण इन 9 दिनों में भयंकर गर्मी होती है। तो आइए जानते हैं कि नौतपा कब खत्म होगा और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Nautapa 2026: सोमवार से शुरू हो रहा है नौतपा, जानें कब होगा खत्म, इस दौरान किन बातों का रखें ख्याल​
Nautapa 2026: सोमवार से शुरू हो रहा है नौतपा, जानें कब होगा खत्म, इस दौरान किन बातों का रखें ख्याल​

नौतपा 2026 कब खत्म होगा?

इस साल 25 मई से नौतपा की शुरुआत हो रही है, जो कि पूरे दिनों तक रहेगा। इस दौरान लोगों को भयंकर गर्मी का सामना करना पड़ेगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 9 दिनों तक सूर्य देव का प्रचंड रूप देखने को मिलता है। लोगों को नौतपा से राहत 2 जून के बाद ही मिलेगा। 2 जून 2026 को नौतपा खत्म हो जाएगा।

नौतपा में किन बातों का ध्यान रखें?

  1. सूर्य देव की उपासना नौतपा के दौरान रोजाना सुबह के समय सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल चढ़ाने के लिए एक तांबे का लोटा लें और उसमें शुद्ध जल, रोली, लाल फूल डाल दें इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। ऐसा करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।

  2. जल का दान नौतपा में गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिलता है। तो ऐसे में जल का दान करें। संभव हो तो राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं या फिर मिट्टी का घड़ा जल से भरा दान करें। जल का दान करने पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

  3. फल और सत्तू का दान नौतपा में जल वाले फल यानी तरबूत और खरबूजा का दान करें। इसके साथ ही इस दौरान सत्तू का दान करना भी अच्छा माना जाता है।

  4. छाता या पंखा का दान नौतपा के दौरान छाता और पंखा का दान भी पुण्यकारी माना गया है। तो अपनी क्षमतानुसार दान जरूर करें।

  5. पशुपक्षियों के लिए जल की व्यवस्था अपनी छत या बालकनी पर पक्षियों के लिए दाना और साफ पानी का कटोरा जरूर रखें। वहीं सड़क किनारे या अपने घर के बार गाय और अन्य पशुओं के लिए भी जल की व्यवस्था करें।