नई दिल्ली। औद्योगिक और व्यावसायिक एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने नॉनडोमेस्टिक पैक्ड एलपीजी की सप्लाई पर लगे सभी क्षेत्रीय प्रतिबंध हटा दिए हैं और आपूर्ति को पश्चिम एशिया संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है।

साथ ही, संकट के शुरू में निलंबित की गई थोक एलपीजी की सप्लाई को भी पूर्वसंकट खपत के 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला एलपीजी सप्लाई की स्थिति में हालिया सुधार के बाद लिया गया है। यह निर्णय होटलों, रेस्तरां, ढाबों, दुकानों, छोटेबड़े उद्योगों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जहां एलपीजी खाना पकाने, हीटिंग और अन्य प्रक्रियाओं के लिए एलपीजी जरूरी ईंधन है।

इस फैसले से आम जनता भी अप्रत्यक्ष रूप से इससे लाभान्वित होगी, क्योंकि व्यावसायिक क्षेत्र में आपूर्ति सामान्य होने से सेवाओं की कीमतों पर दबाव कम होगा और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने की संभावना घटेगी। मार्च, 2026 में ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमले के बाद भारत में एलपीजी की आपूर्ति बाधित हुई थी। इसके बाद कई औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बंद होने की सूचनाएं आई थी। इसकी वजह से सूरत जैसे कई शहरों से प्रवासी श्रमिकों के पलायन भी देखा गया था। अब स्थिति सामान्य हो जाएंगी।

पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर चुनौती पैदा कर दी थी। भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से करीब 8590 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है और ज्यादातर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए पहुंचता है। संकट के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान और शिपिंग समस्याओं के कारण आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

मासिक आयात पहले 20 लाख टन के आसपास था, जो संकट के चरम पर घटकर 1012 लाख टन रह गया। परिणामस्वरूप व्यावसायिक पैक्ड एलपीजी की सप्लाई पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने पड़े ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा सके। कई राज्यों में होटलरेस्तरां, कैंटीन और छोटे उद्योगों को सिलेंडर मिलने में देरी हुई, कुछ जगहों पर कीमतें बढ़ीं और वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ा। थोक एलपीजी की सप्लाई भी लगभग बंद कर दी गई थी।

सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियिम के तहत रिफाइनरियों को पेट्रो रसायनों का उत्पादन बंद करके पूरी तरह से से एलपीजी उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने का आदेश दिया था। इससे घरेलू उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई और रोजाना 40 हजार मीट्रिक टन एलपीजी उत्पादन बनाए रखा गया। भारत की वार्षिक एलपीजी खपत लगभग 3.3 करोड़ टन के आसपास है। इसमें घरेलू उपयोग का हिस्सा सबसे बड़ा है, जबकि व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्र का योगदान भी महत्वपूर्ण है। संकट के दौरान उपभोग में कुछ महीनों में 1319 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, जो आपूर्ति की कमी का नतीजा था।

अब स्वदेशी उत्पादन में सुधार और आयातित एलपीजी कार्गो की अनुमानित उपलब्धता को देखते हुए सरकार ने रिफाइनरियों के लिए सिर्फ एलपीजी उत्पादन करने की बाध्यता खत्म कर दी है। इससे पेट्रोकेमिकल और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों को अधिक फीडस्टॉक मिलेगा, जबकि घरेलू एलपीजी उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। सेंटर ऑफ हाई टेक्नोलॉजी को आवंटन जारी करने और नियमित रिपोर्टिंग का निर्देश भी दिया गया है।

सरकार ने आयल मार्केटिंग कंपनियों को व्यावसायिक और औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं का व्यापक डेटा बनाए रखने और एकीकृत सेक्टोरल डेटाबेस तैयार करने को कहा है ताकि भविष्य में बेहतर प्लानिंग हो सके। इसके साथ ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि वह पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जो व्यावसायिक और बल्क उपभोक्ता पहले से पीएनजी पर शिफ्ट हो चुके हैं, वे वहीं बने रहेंगे। जिनके पास पीएनजी नेटवर्क की पहुंच है या जो शिफ्ट होने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन इकाइयों के साथ समन्वय में धीरेधीरे पीएनजी पर स्थानांतरित किया जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने का अनुरोध किया है।