ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनकी सास Giribala Singh के बयान चर्चा में हैं. बहू की कमियां गिनाते हुए उन्होंने पौधों के लिए अपना प्यार जताया और कहा कि “मेरे पौधे मर जाएंगे”, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक इंसान की जिंदगी से ज्यादा अहमियत अब पौधों की हो गई है.

जिस घर में एक पौधे के सूख जाने का डर किसी इंसान की बुझती जिंदगी से बड़ा हो जाए, वहां रिश्ते नहीं सिर्फ दिखावे जिंदा रहते हैं. ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनकी सास गिरीबाला सिंह जिस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहू की कमियां गिनाती रहीं, उसने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया. “मेरे पौधे मर जाएंगे” कहने वाली सास को शायद यह एहसास ही नहीं हुआ कि उनके ही घर की एक बेटी हमेशा के लिए चली गई. पौधों को “लिविंग एंटिटी” मानने वाली सोच, एक जिंदा इंसान की तकलीफ को क्यों नहीं समझ पाई, यही सवाल अब हर किसी के मन में है.
सिर्फ 5-6 महीने पहले घर आई बहू के लिए दो अच्छे शब्द तक नहीं निकले, लेकिन उसकी आदतों, बीमारी और कमियों की पूरी फेहरिस्त जरूर सामने रख दी गई. दुख इस बात का नहीं कि एक सास अपनी बहू को समझ नहीं पाई, दर्द इस बात का है कि शायद उसने कभी समझने की कोशिश ही नहीं की. अगर पौधों को बचाने की इतनी चिंता थी, तो क्या कभी बहू के मन को सींचने की कोशिश हुई? मरने के बाद तो लोग दुश्मनों के लिए भी नरम पड़ जाते हैं, लेकिन यहां एक मां जैसी रिश्तेदारी में भी अपनापन नहीं दिखा. शब्द तो शब्द लेकिन चेहरे पर बहू के जाने का जरा सा भी दुख नहीं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आंसू तक नहीं निकला, हां अगर पौधे सूख जाएंगे, तो यकीनन आपका दिल तड़प उठेगा.
ट्विशा की सास को है पौधो की चिंता
सास ने बताया कि एक तरफ ट्विशा को पौधे अच्छे लगते हैं, लेकिन पौधों की देखरेख नहीं करती थी. दूसरी तरफ बच्चे अच्छे लगते हैं, लेकिन बच्चे पैदा नहीं करना. इसके आगे उन्होंने बताया कि उन्हें पौधों से इतना प्यार कि ‘जब पुलिस ने उनका घर लॉक किया , तो उन्होंने बोला था कि उनके सारे पौधे मर जाएंगे.’
पांच महीनों तक नहीं आए ट्विशा के पेरेंट्स
ट्विशा की सास का कहना है कि जब उसने MTP प्रोसेस पूरा किया. उस दौरान उन्होंने मैंने उसकी मां को अपने घर बुलाया, ताकि वह ट्विशा के साथ रह सके, क्योंकि उसे उनकी जरूरत थी, लेकिन वह लोग तब भी नहीं आए. इतना ही नहीं, पांच महीनों तक, उसके माता-पिता कभी भी अपनी बेटी से मिलने नहीं आए.



