Himachal Se: Guru Pradosh Vrat 2026:14 मई को प्रदोष का व्रत रखा जाएगा। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं जब प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन प्रदोष काल में महादेव की आराधना करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि आर्थिक तंगी और शत्रुओं से भी मुक्ति मिलती है। वहीं प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सभी परेशानियों से शीघ्र छुटकारा मिल जाता है। तो चलिए जानते हैं कि कल प्रदोष काल कितने बजे तक रहेगा और महादेव की पूजा के लिए कौनसा समय सबसे अधिक शुभ रहेगा।

गुरुवार को इतने बजे तक रहेगा प्रदोष काल का समय?
पंचांग के अनुसार, 14 मई को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि गुरुवार को सुबह 11 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि लग जाएगी। त्रयोदशी तिथि का समापन 15 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा। गुरु प्रदोष के दिन प्रदोष काल का समय शाम 7 बजकर 5 मिनट से रात 9 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। आपको बता दें कि प्रदोष व्रत में प्रदोष काल का विशेष महत्व होता है।
गुरु प्रदोष 2026 शुभ मुहूर्त
गुरु प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे उत्तम शुभ मुहूर्त 07:05 पी एम से 09:17 पी एम तक रहेगा। प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा शाम के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है। गुरुवार को शाम को महादेव की विशेष कृपा पाने के लिए पास लगभग सवा दो घंटे का समय होगा। बता दें कि सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आगमन से पहले के समय को ‘प्रदोष काल’ कहा जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस मुहूर्त में की गई पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है।
गुरु प्रदोष के दिन करें ये उपाय, दूर होंगे सारे कष्ट
- प्रदोष व्रत में सात्विकता का पालन करें और शाम की पूजा से पहले स्नान करके साफ सफेद, पीले या अन्य शुभ रंग के वस्त्र धारण करें।
- यह गुरु प्रदोष है इसलिए शिव चालीसा के साथ ही ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का भी जाप करें। ऐसा करने से हर काम में सफलता मिलेगी।
- प्रदोष काल में मंदिर में एक घी का दीपक और एक चौमुखी तेल का दीपक जरूर जलाएं। इस उपाय को करने घर में सुखशांति बनी रहती है।
- शाम की पूजा में शिवलिंग पर अक्षत और शहद चढ़ाएं। इस उपाय को करने से कर्ज से मुक्ति मिलेगी।



