Himachal Se: ​Kanpur Police News: कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में अनुशासन का डंडा चलते ही महकमे में हड़कंप मच गया है. लंबे समय से बिना किसी पूर्व सूचना के ड्यूटी से गायब चल रहे पुलिसकर्मियों पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है. पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई के तहत 14 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि 118 अन्य पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है.

152 दिन से दरोगा जी गायब… कानपुर के 118 पुलिसकर्मी कहां हो गए ‘लापता’? अफसरों ने भेजा नोटिस​
152 दिन से दरोगा जी गायब… कानपुर के 118 पुलिसकर्मी कहां हो गए ‘लापता’? अफसरों ने भेजा नोटिस​

​विभाग की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. कई पुलिसकर्मी महज दो से पांच दिनों की छुट्टी लेकर गए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उन्होंने वापस आमद नहीं कराई. सस्पेंड किए गए कर्मियों में पुलिस लाइन में तैनात दो उपनिरीक्षक भी शामिल हैं. एक दरोगा पिछले 37 दिनों से गायब हैं, तो दूसरे 152 दिनों से लापता चल रहे हैं. सिपाही दुष्यंत इस सूची में सबसे ऊपर हैं, जो पिछले 168 दिनों से ड्यूटी से गैरहाजिर हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सब इंस्पेक्टर मोनू सिंह भी पिछले 54 दिनों से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित पाए गए हैं.

2025 में भी ऐसा ही आया था मामला

पुलिस प्रशासन की यह कार्रवाई केवल हालिया मामलों तक सीमित नहीं है. अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले जुलाई 2025 में भी 161 पुलिसकर्मियों की कार्यशैली और उपस्थिति की जांच की गई थी. उस दौरान भी यह तथ्य सामने आया था कि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी बिना अनुमति के कार्यस्थल से गायब रहते हैं, जिससे कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

​आलाधिकारियों का यह कहना है कि सभी गैरहाजिर पुलिसकर्मियों को पहले भी औपचारिक पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. अब 118 कर्मियों को दोबारा नोटिस जारी किए गए हैं.’

क्या बोले अधिकारी?

पुलिस कमिश्नर संकल्प शर्मा ने बताया कि अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो भविष्य में सेवा समाप्ति जैसी सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है.”

जिन 118 कर्मियों को नोटिस जारी किया गया है, उन्हें एक निश्चित समयावधि के भीतर अपनी अनुपस्थिति का ठोस कारण बताना होगा. यदि वे बीमारी या किसी अन्य गंभीर कारण का प्रमाण नहीं दे पाते हैं, तो उनके खिलाफ भी निलंबन और विभागीय जांच शुरू की जाएगी.