Himachal Se: गुड़हल का फूल घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है, सुखसमृद्धि लाता है और वातावरण को शुद्ध करता है। हालाँकि, गुड़हल को देखभाल की बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है। इसके पौधे के साथ यह समस्या होती है कि लगभग दो हफ़्तों तक तो इनमें खूब फूल खिलते हैं, लेकिन उसके बाद अचानक यह प्रक्रिया रुक जाती है। बता दें। फूलों के खिलने को प्रभावित करने वाले कारकों में रोशनी, पानी देना, छंटाई, मिट्टी की गुणवत्ता शामिल हैं। फिर भी, अगर सही देखभाल की जाए, तो गुड़हल लगभग पूरे साल खिलता रहेगा। चलिए जानते हैं वे टिप्स कौन से हैं?

आपका घर लाल-लाल गुड़हल के फूलों से रहेगा हमेशा गुलजार, बस जान लें मिट्टी, पानी और खाद देने का सही तरीका​
आपका घर लाल-लाल गुड़हल के फूलों से रहेगा हमेशा गुलजार, बस जान लें मिट्टी, पानी और खाद देने का सही तरीका​

गुड़हल को घर में उगाने के लिए करें ये काम:

 

  • रोशनी मिले: सूरज की रोशनी गुड़हल में फूल अच्छी तरह से खिलते हैं। इसके पौधें को सूरज की रोशनी कम से कम पाँच से छह घंटे मिलना चाहिए। पर्याप्त धूप न मिलने पर पौधा पत्तियाँ तो उगाता रहेगा, लेकिन उसमें फूलों की कलियाँ ज़्यादा नहीं बनेंगी। इसलिए, बालकनी और छत जैसी खुली जगहें गुड़हल के पौधे के लिए सबसे अच्छी साबित हो सकती हैं।

  • पानी दें:  ज़रूरत से ज़्यादा पानी देना और नमी की कमी, दोनों ही गुड़हल के फूलों की गुणवत्ता पर असर डालती हैं। हालाँकि, गुड़हल को थोड़ी नम मिट्टी पसंद होती है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ें सड़ सकती हैं। पानी देने से पहले मिट्टी की ऊपरी परत को देख लेना फायदेमंद होता है, ताकि उसकी नमी का सही स्तर बना रहे।

  • छंटाई करें: गुड़हल में लगातार फूल खिलते रहने के लिए नियमित छंटाई बहुत ज़रूरी है। इसमें कमज़ोर टहनियों, सूखी डंडियों और मुरझाए हुए फूलों को काटना शामिल है। नियमित छंटाई करने से आसपास हवा का बहाव बेहतर होता है, और सूरज की रोशनी पौधे की अंदरूनी परतों तक आसानी से पहुँच पाती है।

  • खाद दें: गुड़हल में बारबार फूल खिलने की वजह से उसे नियमित रूप से खाद देना बहुत ज़रूरी है। खाद के तौर पर, ये पौधे नाइट्रोजन वाली खाद के बजाय पोटैशियम और फास्फोरस वाली खाद ज़्यादा पसंद करते हैं।

  • गमला बदलें और मिट्टी बदलें: कुछ सालों के बाद, पौधा गमले और मिट्टी के हिसाब से बहुत बड़ा हो जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसका मतलब है कि जड़ें अब पोषक तत्व सोख नहीं पातीं, और मिट्टी से पानी निकलने की व्यवस्था खराब हो जाती है। हर दो साल में गमले की मिट्टी बदलना या पौधे को थोड़े बड़े गमले में लगाना फायदेमंद हो सकता है।