ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी देशों के बीच बातचीत की नई कोशिशें शुरू हुई हैं, जिनमें पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद पहुंचकर पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की और तेहरान की मांगों तथा अमेरिका की शर्तों पर अपनी आपत्तियां स्पष्ट रूप से रखीं। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है और किसी भी समझौते में उसकी सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि रहेगी।
इसी बीच, अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी पाकिस्तान पहुंच रहे हैं, जहां वह ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता में हिस्सा लेंगे। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह सीधे तौर पर अमेरिका के साथ आमने सामने बातचीत नहीं करेगा और अपनी बात पाकिस्तान के माध्यम से ही रखेगा। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहरा है।

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उधर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में इन वार्ताओं को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। शहर के कई हिस्सों में लॉकडाउन जैसी स्थिति है, प्रमुख मार्ग बंद हैं और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। पहले दौर की वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी, ऐसे में इस बार भी अनिश्चितता बनी हुई है। इस्लामाबाद की ओर जाने वाली मुख्य सड़कों को बंद कर दिया गया है तथा उस ‘रेड जोन’ को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है जहां प्रमुख सरकारी भवन एवं राजनयिक मिशन स्थित हैं। पास के वाणिज्यिक क्षेत्र ‘ब्लू एरिया’ में बाजार सुनसान हैं, कैफे में आपूर्ति कम हो रही है और बस अड्डों की सेवाएं बंद होने के कारण सार्वजनिक परिवहन बाधित है जिससे यात्रियों को परेशानी हो रही है। लोगों के लिए अनिश्चितता सबसे कठिन स्थिति है। हाल के सप्ताहों में यह दूसरा ‘लॉकडाउन’ है। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच वार्ता के लिए इस्लामाबाद में पहले 11 अप्रैल को ‘लॉकडाउन’ किया गया था। वह वार्ता कोई समझौता हुए बिना समाप्त हो गई थी। इसके बाद शहर कुछ समय के लिए खुला, लेकिन पाकिस्तान द्वारा एक और दौर की बातचीत की मेजबानी की तैयारियां किए जाने के बीच पाबंदियां फिर लागू कर दी गईं। हालांकि, वार्ता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हम आपको याद दिला दें कि ट्रंप ने ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम को मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया था ताकि तेहरान को युद्ध समाप्त करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का और समय मिल सके। यह फैसला युद्धविराम की अवधि समाप्त होने से कुछ घंटे पहले किया गया।
दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश के भीतर एकता की सराहना की है और कहा है कि दुश्मनों को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। सुरक्षा कारणों से वह सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आ रहे हैं और उनके निर्देश विशेष माध्यमों से जारी किए जा रहे हैं।
उधर, मैदान में स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपनी नौसेना को होरमुज जलडमरूमध्य में ईरानी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह जलमार्ग विश्व के तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, लेकिन युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है। इसके अलावा, लेबनान में भी संघर्ष जारी है, जहां हिजबुल्लाह ने युद्धविराम बढ़ाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और एक इजराइल ड्रोन को मार गिराया। इसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के खियाम शहर में बमबारी की, जिसमें रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए। इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
इसी बीच, खाड़ी क्षेत्र में भी अस्थिरता देखने को मिली है। कतर ने कुवैत पर हुए ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। कतर ने इराक से ऐसे हमलों को रोकने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। वहीं ईरान ने आंतरिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए हैं। उसने एक व्यक्ति को इस्राइल के लिए जासूसी करने के आरोप में फांसी दे दी है। यह कार्रवाई उन कई मामलों में से एक है, जिनमें हाल के महीनों में सख्ती बढ़ाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
युद्ध के बीच एक सकारात्मक संकेत यह भी है कि ईरान ने लगभग दो महीने बाद तेहरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से वाणिज्यिक उड़ानों को फिर से शुरू कर दिया है। इससे यह उम्मीद जगी है कि स्थिति धीरे धीरे सामान्य हो सकती है, हालांकि पूरी तरह स्थिरता अभी दूर है। तुर्की ने भी संकेत दिया है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होता है तो वह होरमुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग हटाने के काम में भाग ले सकता है। तुर्की ने इसे मानवीय जिम्मेदारी बताया है और बहुपक्षीय सहयोग की वकालत की है।
वहीं, ईरान के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह इस युद्ध से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहा है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ईरान का दावा है कि उसकी सैन्य ताकत ने अमेरिका को कठिन स्थिति में डाल दिया है।
कुल मिलाकर स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां भी थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या यह संघर्ष और गहराता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान में होने वाली इन महत्वपूर्ण वार्ताओं पर टिकी हुई हैं, जो इस संकट के भविष्य को दिशा दे सकती हैं।