
लड़कियों ने फिर मारी बाजी.’ हर साल जब 10वीं या 12वीं के परिणाम आते हैं, तो हेडलाइंस कुछ ऐसी ही होती है. यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे आज जारी हो गए हैं. आज यह सबसे अधिक सर्च किया जाने वाला की-वर्ड रहा. टॉपर्स की लिस्ट पर गौर फरमाएं तो इंटरमीडिएट में पहले स्थान पर सीतापुर की शिखा वर्मा रहीं. दूसरे नंबर पर बरेली की नंदिनी गुप्ता और बाराबंकी की श्रिया वर्मा, तीसरे नंबर पर सुरभि यादव और पूजा पाल रहीं. वहीं हाईस्कूल की लिस्ट पर गौर करें तो टॉपर्स में कशिश वर्मा, अंशिका वर्मा, अदिति, अर्पिता, परी वर्मा के नाम सामने आए. सबसे अधिक नंबर लाने वाले स्टूडेंट्स में लड़कियां हैं. ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है. पिछले साल भी महक जायसवाल, साक्षी, शिवानी, ऋतु, अर्पिता, सिमरन का नाम सबसे बेहतर नंबर लाने वालों में सामने आया था. खास बात रही कि अच्छे नंबर लाने वालों में लड़कियों की तादाद ज्यादा नजर आती है. लड़के अक्सर पिछड़ते नजर आते हैं. हालांकि स्पष्ट कर दें कि लड़के और लड़कियों के बीच ऐसा कुछ जनरलाइज करके नहीं देखा जा रहा है. लेकिन सवाल उठता है कि स्कूल लेवल की परीक्षाओं में लड़कियों अक्सर बेहतर क्यों साबित होती हैं?
लड़कियां क्यों परीक्षा में लड़कों से अधिक नंबर लाती हैं? लड़कों से अधिक नंबर लाकर बाजी मारने का राज क्या है? दोनों में से किसका ब्रेन ज्यादा शार्प होता है? ऐसे कौन से मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तौर-तरीके होते हैं, जो यहां डिसाइडिंग फैक्टर का काम करते हैं? यह एक ऐसा विषय है जिस पर हर साल बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद लंबी बहस छिड़ती है. अक्सर देखा गया है कि टॉपर्स की लिस्ट में लड़कियों का दबदबा रहता है. क्या यह केवल संयोग है, या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण है? आइए जानते हैं हर एक सवाल का जवाब.
क्या लड़कियों का ब्रेन ज्यादा ‘शार्प’ होता है?
विज्ञान के नजरिए से देखें तो यह कहना गलत होगा कि किसी एक लिंग का दिमाग दूसरे से ‘ज्यादा शार्प’ होता है. लेकिन मस्तिष्क की संरचना में कुछ अंतर जरूर होते हैं. महिलाओं के दिमाग में हिप्पोकैम्पस (Hippocampus) अक्सर अधिक सक्रिय और थोड़ा बड़ा होता है, जो याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़ा होता है. लड़कियां मल्टीटास्किंग होती हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। महिलाओं के ब्रेन के दोनों गोलार्द्ध यानी हेमिस्फीयर के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अधिक तेजी से होता है, जिससे वे एक साथ कई चीजों पर ध्यान केंद्रित कर पाती हैं.
क्या है ‘सफलता का राज’ और मनोवैज्ञानिक कारण?
परीक्षा में अधिक नंबर लाना केवल ‘इंटेलिजेंस’ पर निर्भर नहीं करता, बल्कि कुछ आदतों पर निर्भर करता है, जहां लड़कियां अक्सर बाजी मार लेती हैं. इसमें से कुछ पर गौर कर लेते हैं.
अनुशासन और धैर्य: पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के एक अध्ययन के अनुसार, लड़कियां लड़कों की तुलना में अधिक Self-disciplined होती हैं। वे होमवर्क समय पर करना, क्लास में नोट्स बनाना और योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई करने में लड़कों से आगे रहती हैं।
इच्छाशक्ति की क्षमता: मनोवैज्ञानिक रूप से लड़कियों में ‘इच्छाओं को रोकने’ की क्षमता अधिक देखी गई है. उदाहरण के लिए, परीक्षा के दौरान खेल या मोबाइल को छोड़कर पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की इच्छाशक्ति लड़कियों में अधिक मजबूत होती है.
सामाजिक दबाव और जिम्मेदारी: कई समाजशास्त्री मानते हैं कि लड़कियों को अक्सर यह साबित करना होता है कि वे लड़कों से कम नहीं हैं. शिक्षा उनके लिए ‘आजादी’ का रास्ता है, इसलिए वे इसे बहुत गंभीरता से लेती हैं. वहीं, लड़के अक्सर अपनी पढ़ाई को लेकर थोड़े लापरवाह हो सकते हैं.