पाकिस्तान में हलचल मची हुई है। अमेरिका और ईरान ने संकेत दिया है कि वे इस्लामाबाद में नए दौर की युद्धविराम वार्ता में शामिल होंगे।  अधिकारियों की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब न तो अमेरिका और न ही ईरान ने सार्वजनिक रूप से वार्ता के समय की पुष्टि की है। वहीं, ईरानी सरकारी टेलीविजन ने इस बात से इनकार किया है कि उनके देश का कोई अधिकारी पहले से ही पाकिस्तान की राजधानी में मौजूद है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तारीफें हो रही हैं। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर इन दोनों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग जोर पकड़ रही है। पाकिस्तान ने इसे अपनी मध्यस्था का परिणाम बताया और पाकिस्तान में खबर आते ही मीडिया और सोशल मीडिया में खुशी का माहौल बन गया। मीडिया में खुशी का माहौल बन गया। टीवी डिबेट्स में इसे पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया गया। सभी पैनलिस्ट ने कहा कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनी नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे ज्यादा उम्मीदवार हैं। कई लोगों ने दुनिया के नेताओं से अपील की कि वे इन्हें नॉमिनेट करें। 

Pakistan की मेहनत पर फिरा पानी, Trump के एक Tweet ने US-Iran समझौते पर लगाया ब्रेक!

अब तो खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा में मंगलवार को एक प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को कूटनीति के माध्यम से क्षेत्रीय तनाव कम करने में उनकी भूमिका के मद्देनजर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अनुशंसित किया गया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की विधायक फराह खान ने यह प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय को दिया। इसमें वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के समय पाकिस्तान की ‘‘जिम्मेदार, विवेकपूर्ण और सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी’’ की सराहना की गई है। प्रस्ताव की विषयवस्तु के अनुसार, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर शांति को बढ़ावा देने और उसे बनाए रखने में पाकिस्तान के योगदान को स्वीकार किया गया है। इसमें शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व की सराहना की गई है, जिसमें उनके दूरदर्शी नेतृत्व, रणनीतिक दूरदर्शिता और अथक कूटनीतिक प्रयासों को रेखांकित किया गया है। प्रस्ताव में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है और एक जिम्मेदार, शांतिप्रिय और सुलह को बढ़ावा देने वाले राष्ट्र के रूप में उभरा है, साथ ही अपनी कूटनीतिक भूमिका के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। इसमें कहा गया है कि देश के प्रयासों ने संभावित वैश्विक संकट को टालने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव को कम करने में योगदान दिया। 

इस्लामाबाद वार्ता 2.0: जंग रोकने की बड़ी कूटनीतिक कोशिश, Pakistan की मध्यस्थता में मिलेंगे America-Iran के टॉप लीडर्स

प्रस्ताव का समापन यह कहते हुए किया गया है कि शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जाए। इस बीच, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सदन में इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना कम है, क्योंकि बहुमत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के पास है और वह इसका विरोध कर सकती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रस्ताव पेश भी किया जाता है, तो उसके पारित होने की संभावना न के बराबर है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ प्रमुख इमरान खान ने 2022 में मुनीर की सेना प्रमुख के रूप में नियुक्ति का विरोध किया था। शहबाज और मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग संबंधी इसी तरह का एक प्रस्ताव पंजाब विधानसभा ने 16 अप्रैल को सर्वसम्मति से पारित किया था।