भारत में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद पहली बार यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलस्की के बेहद करीबी और वहां की सुरक्षा परिषद के सचिव रस्टम ओमेरो भारत दौरे पर आई। उन्होंने दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबाल और विदेश मंत्री एल जयशंकर के साथ लंबी बातचीत की। यूक्रेन के एनएसए ऐसे वक्त पर भारत आए हैं जब दोनों देशों के बीच कूटनीति के साथ-साथ कानूनी खींचतान भी चरम पर है। इस हाई प्रोफाइल मुलाकात का सबसे बड़ा सस्पेंस वो घटना है जो पिछले महीने 13 मार्च को मिजोरम में हुई थी। दरअसल 13 मार्च को भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया था। एनआईए ने इन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि यह लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए। लेकिन इनका असली मकसद म्यांमार के विद्रोही संगठनों को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देना और हथियार मुहैया कराना था।

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हालांकि यूक्रेन ने इस पर पहले तीखी प्रतिक्रिया भी दी थी। उन्होंने एक प्रोटेस्ट नोट जारी कर अपने नागरिकों की रिहाई की मांग की थी और कहा था कि सीमाएं स्पष्ट ना होने की वजह से अनजाने में सीमा पार हुई होगी। इस तनावपूर्ण पृष्ठभूमि के बीच उमेरोप का भारत आना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि एनएसए अजीत डोबाल और रुस्तम उमेरोप की मुलाकात में मुख्य एजेंडा द्विपक्षीय संबंधों और युद्ध के हालात थे। रणधीर जयसवाल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस मुलाकात की एक तस्वीर शेयर की और साथ ही साथ यह जानकारी भी दी कि दोनों पक्षों ने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। डोबाल ने एक बार फिर से दोहराया भारत शांति का पक्षधर है लेकिन यह शांति संवाद और कूटनीति से ही आनी चाहिए। भारत ने यह साफ किया कि किसी भी मुद्दे का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं हो सकता। 

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वहीं मुलाकात के बाद यूक्रेन के उमेरोब ने कहा कि उन्होंने डोबाल को फ्रंट लाइन की जमीनी हकीकत बताई। उन्होंने भारत की समझ की तारीफ करते हुए कहा मैं समाधान खोजने की इस साझा समझ के लिए आभारी हूं। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि बंद कमरों में फंसे यूक्रेनी नागरिकों को लेकर भी जरूर एनएसए डोबाल के साथ चर्चा हुई होगी। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि इस बात की पुष्टि भारत तक नहीं करता है। वहीं ओमेरो ने विदेश मंत्री ए जयशंकर से भी अलग से मुलाकात की। यहां चर्चा का केंद्र अगस्त 204 में पीएम मोदी की कीव यात्रा के दौरान हुए समझौते रहे। यूक्रेन चाहता है कि भारत उन समझौतों को जमीन पर उतारने में तेजी दिखाए और शांति बहाली में अपनी भूमिका निभाए। हालांकि यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी को लेकर वैसे तो कोई जानकारी सामने नहीं आई लेकिन उमेरोव की इस यात्रा को उससे भी जोड़कर देखा जा रहा है।