
अधिकतर टैबलेट के बीच में हल्की लाइन बनी होती है. कुछ गोली में यह नहीं होती है. लेकिन ज्यादातर दवाई में ये लाइन होती है. अक्सर लोग इसे डिजाइन मान जाते हैं. लेकिन इस लाइन के पीछे की कुछ खास वजह होती है. इस लाइन को मेडिकल टर्म में स्कोर लाइन कहते हैं. एक्सपर्ट के अनुसार यह लाइन दवाई को बराबर मात्रा में तोड़ने की बनाई होती है. एशियन हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर एवं हेड -इंटरनल मेडिसिन डॉ. सुनील राणा से जानते हैं दवाई में ये लाइन क्यों होती है.
क्यों होती है दवाई पर लाइन
एक्सपर्ट के अनुसार कुछ टैबलेट्स पर बनी स्कोर लाइन दवाई को बराबर हिस्से में तोड़ने में मददगार है. ताकि मरीज आसानी से आधी गोली लें. कई बार डॉक्टर आधी गोली की डोज देते हैं. इस लाइन की मदद से गोली को आधा आसानी से तोड़ा जा सकता है. मरीज को सही से डोज मिले इसलिए गोली बनाते समय ये लाइन बनाई जाती है.
जिन गोली में लाइन ना हो
जिन गोली में लाइन नहीं होती है. इसका मतलब है कि जब दवाई पर स्कोर लाइन नहीं है तो इसका मतलब है कि इस गोली को तोड़ना नहीं चाहिए. नहीं तो इसका असर कम हो सकता है. डॉक्टर का कहना है कि कुछ दवाई में एंटेरिक कोटेड या सस्टेन्ड रिलीज होती है, जिसे तोड़ने से उसका असर बदल सकता है. ऐसे में टैबलेट को तोड़ने से दवा का साइड इफेक्ट्स का रिस्क बढ़ सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर दवा पर स्कोर लाइन है तो दवा को तोड़ सकते हैं.
ये कोई डिजाइन नहीं
एक्सपर्ट के अनुसार टैबलेट के बीच की लाइन केवल डिजाइन नहीं है, यह एक जरूरी फीचर है. स्कोरिंग लाइन की मदद से दवाई को आसानी से तोड़ा जा सकता है. अगर दवाई को बराबर मात्रा में तोड़ा ना जाए तो मरीज को पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा.