इस्लामाबाद की बंद कमरों वाली बातचीत टूटी और दुनिया की सांसे अटक गई। जैसे ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हुई हर किसी को लगा कि अब वेस्ट एशिया में बारूद फटेगा। लेकिन ठीक उसी वक्त ईरान ने एक ऐसा बयान दे दिया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है। ईरान ने साफ कह दिया कि अगर दुनिया में कहीं शांति की चाबी है तो वह भारत के पास है। हैरानी की बात देखिए। एक तरफ महाशक्तियां युद्ध के मुहाने पर खड़ी हैं और दूसरी तरफ ईरान के राजदूत सैयद रजा मोसेब मोतलाद मुंबई में बैठकर भारत की तारीफों के कसीदे पढ़ रहे हैं।
ईरान ने अमेरिका पर तंज कसते हुए उसे तनाव की सबसे बड़ी वजह बताया। लेकिन साथ ही भारत, रूस और चीन को वो त्रिमूर्ति करार दिया जो तीसरे विश्व युद्ध को रोक सकती है। ईरान ने भारत को सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक ताकत बताया है। अब सवाल उठता है कि क्या भारत सिर्फ तमाशबीन नहीं बल्कि इस खेल का सबसे बड़ा और निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दरअसल जब अमेरिका और ईरान की बातचीत फेल हुई, तो ईरान ने खुलेआम कह दिया कि भारत ने अपने हितों को जोखिम में डालकर भी स्थिरता का साथ दिया है। भारत ने ना तो अमेरिकी हमलों का अंधा समर्थन किया और ना ही युद्ध की आग में घी डाला।
भारत की इसी न्यूट्रल पॉलिसी और संतुलित व्यवहार का नतीजा है कि आज ईरान जैसा देश भी भारत के सामने उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। मजे की बात तो यह है कि ईरान ने सिर्फ जुबानी जमा खर्च नहीं किया बल्कि उसने भारत के जहाजों को होरमुज स्टेट से सुरक्षित निकलने देकर यह साबित कर दिया कि वह भारत की कितनी इज्जत करता है। एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिस्कियन और रूस के राष्ट्रपति पुतिन फोन पर कूटनीतिक समाधान की खिचड़ी पका रहे हैं तो दूसरी तरफ पूरी दुनिया की नजरें दिल्ली पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या भारत आगे बढ़कर शांति का सबसे बड़ा चेहरा बनेगा या फिर रूस और चीन के साथ मिलकर अमेरिका को युद्ध के मैदान से पीछे हटने पर मजबूर कर देगा। कूटनीति की बिसात बिछ चुकी है और ईरान ने अपना मोहरा चल दिया है। अब देखना यह होगा कि भारत का अगला कदम क्या होगा क्योंकि ईरान ने तो साफ कर दिया है कि दुनिया को जंग से बचाना है तो भारत को आगे आना ही होगा।



