पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच फर्जी शांति वार्ता पूरी तरह से फेल हो गई है। हालत यह हुई कि पाकिस्तान के लोग ही इस्लामाबाद टॉक्स नाम की इस फर्जी शांति वार्ता के पोस्टर चुरा कर ले गए। लेकिन दुनिया की नजरों से दूर असली बातचीत तो भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुई है। इस बातचीत के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने हिंदी में भारत पर एक ऐसा ऐलान कर दिया जिसे देखकर एक-एक भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। संयुक्त अरब अमीरात के कई ताकतवर लोगों ने हिंदी में भारत के बारे में जो लिखा है वो इतिहास में आप पहली बार देखेंगे। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। कई लोग सोशल मीडिया पर बोल रहे हैं कि संयुक्त अरब अमीरात के असली मुस्लिमों ने हिंदी में जो लिखा है उसे पढ़कर कन्व्टेड मुस्लिमों में हड़कंप मच जाएगा। 

सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात के एक लेखक और राजनैतिक विशेषज्ञ अहमद ताहा ने कहा कि भारत एक सच्चा बहादुर सहयोगी है जो दुनिया को अपना असली रूप दिखाएगा। भारत एक मजबूत देश है जिससे सभी इस्लामी जिहादी आतंकवादी डरते हैं। आप आखिरी लाइन को आंख खोल कर पढ़िए। संयुक्त अरब अमीरात का एक ताकतवर मुस्लिम शख्स बोल रहा है कि भारत एक मजबूत देश है जिससे सभी इस्लामी जिहादी आतंकवादी डरते हैं। अहमद ताहा ने यहां पर ऐसा बयान देकर पाकिस्तान के कन्व्टेड मुस्लिमों के मुंह पर तमाचा मारा है। संयुक्त अरब अमीरात के एक दूसरे ताकतवर व्यक्ति ने लिखा है कि भारत एक सच्चा साथी है। तीसरे ने कहा है कि भारत सच्चा सहयोगी है। आपको बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात में अब हजारों लोग हैं जो भारत के दीवाने हो चुके हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि ये सभी लोग हिंदी में ऐसा क्यों लिख रहे हैं? दरअसल इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पाकिस्तान है। 

हिंदी में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान की वजह से ही भारत से मदद मांगी है और मजे की बात देखिए कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मदद करने पहुंच भी गए। दरअसल पाकिस्तान पिछले कई सालों से संयुक्त अरब अमीरात के पीछे पड़ा है। इसकी सबसे बड़ी वजह संयुक्त अरब अमीरात की भारत से दोस्ती है। संयुक्त अरब अमीरात वो इकलौता खाड़ी देश है जिसने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया। कश्मीर में निवेश किया आर्टिकल 370 पर कोई बयानबाजी नहीं की। वेस्ट एशिया में संयुक्त अरब अमीरात भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन गया है। इसी से जलकर संयुक्त अरब अमीरात को अस्थिर करने के लिए पाकिस्तान ने सबसे पहले सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील कर ली। इसके बाद पाकिस्तान ने तुर्की के साथ मिलकर संयुक्त अरब अमीरात के राजघराने को तोड़ने की कोशिश की। जिससे नाराज़ होकर संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को दिया अपना $3 बिलियन डॉलर का लोन वापस मांग लिया। भिखारी पाकिस्तान ने लोन चुकाने के लिए सऊदी अरब और कतर से पैसा मांगा लेकिन सऊदी अरब ने ऐसी शर्त रख दी जिसे ना मानने पर भी पाकिस्तान फंसता और मानने के बाद तो और भी बुरा मरेगा। दरअसल सऊदी अरब ने क़तर के साथ मिलकर कहा कि हम पाकिस्तान को $5 बिलियन दे देंगे। लेकिन उससे पहले पाकिस्तान को अपने 13,000 सैनिक और 18 लड़ाकू विमान ईरान से लड़ने के लिए भेजने होंगे। मजबूरी में पाकिस्तान ने यह फैसला ले लिया है। अब अगर सऊदी अरब पाकिस्तान को ईरान पर हमला करने के लिए आदेश देता है तो पाकिस्तान को आदेश मानना पड़ेगा।