मेरठ ‘भूत बंगले’ के वो 5 महीने… पोस्टमार्टम रिपोर्ट से नहीं सुलझी प्रियंका की मौत की गुत्थी, अब मोबाइल खोलेगा राज

उत्तर प्रदेश के मेरठ में बेटी की लाश संग 5 महीने रहने वाले पिता के केस में अब एक और अड़चन सामने आई है. मृतका का शव सड़कर कंकाल बन चुका था, जिस कारण पोस्टमार्टम करने में काफी कठिनाई आई. उसकी रिपोर्ट साफ नहीं आ पाई है. जिस कारण अब मृतका के मोबाइल को खंगाला जाएगा, ताकि मौत की हकीकत पर से पर्दा उठ सके. दरअसल, सदर बाजार के तेली मोहल्ला में एक पिता अपनी जवान बेटी की लाश के साथ महीनों तक एक ही छत के नीचे रहा. दुर्गंध को दबाने के लिए वह परफ्यूम छिड़कता रहा और जब लाश कंकाल में बदलने लगी, तो उसे कमरे में बंद कर तीर्थ यात्रा पर निकल गया.

यह मामला जितना दर्दनाक है, इसकी गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. शुक्रवार रात जब पुलिस ने तेली मोहल्ला स्थित घर का दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का मंजर भयावह था. 20-22 साल की प्रियंका का शव पूरी तरह सड़ चुका था. मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जब शव का पोस्टमार्टम किया, तो पाया कि प्रियंका के शरीर के 80 प्रतिशत से ज्यादा अंग नष्ट हो चुके थे. कंकाल के नाम पर केवल पैर का कुछ हिस्सा और हड्डियां ही शेष बची थीं.

डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि शव इतना पुराना और गल चुका है कि मृत्यु का सही समय और कारण पता लगाना अब चिकित्सा विज्ञान के लिए लगभग असंभव है. इस रिपोर्ट ने पुलिस के सामने एक बड़ी कानूनी दीवार खड़ी कर दी है.

लाश के साथ पिता की रहस्यमयी जिंदगी

मृतका का पिता उदय भानु, जिसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं बताई जा रही है, बेटी की मौत के बाद भी महीनों तक उसी घर में रहा. जब लाश सड़ने लगी और बदबू पड़ोसियों तक पहुँचने का डर हुआ, तो वह लगातार घर में परफ्यूम का इस्तेमाल करता रहा. दिसंबर के महीने में वह मकान में ताला लगाकर हरिद्वार और देहरादून चला गया.

हैरानी की बात यह है कि वह वहां के धर्मशालाओं में रुका और पंडितों से गुपचुप तरीके से अंतिम संस्कार की विधि पूछता रहा. तीन दिन पहले जब कुछ रिश्तेदारों ने उसे बेगम बाग इलाके में देखा और प्रियंका के बारे में कड़ाई से पूछा, तब जाकर इस खौफनाक राज का पर्दाफाश हुआ.

प्रियंका का मोबाइल: आखिरी उम्मीद

अब जबकि मेडिकल रिपोर्ट ने हाथ खड़े कर दिए हैं, पुलिस की सारी उम्मीदें प्रियंका के मोबाइल फोन पर टिकी हैं. उदय भानु अपनी बेटी का फोन भी अपने साथ हरिद्वार ले गया था. पुलिस को संदेह है कि मोबाइल की कॉल डिटेल्स, मैसेज या किसी वीडियो रिकॉर्डिंग से यह पता चल सकता है कि मौत के आखिरी घंटों में प्रियंका के साथ क्या हुआ था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। एसएसपी अविनाश पांडेय के निर्देश पर मेरठ पुलिस की एक टीम उदय भानु को साथ लेकर हरिद्वार रवाना हुई है, ताकि उस धर्मशाला से मोबाइल बरामद किया जा सके जहाँ वह रुका था. मोबाइल मिलने के बाद उसे फॉरेंसिक लैब (FSL) भेजा जाएगा.

मनोचिकित्सक करेंगे पिता की काउंसलिंग

उदय भानु के बयान बार-बार बदल रहे हैं. कभी वह बेटी की बीमारी की बात करता है, तो कभी चुप्पी साध लेता है. पुलिस अब एक पैनल ऑफ सायकायट्रिस्ट (मनोचिकित्सकों की टीम) से उदय भानु की काउंसलिंग कराएगी. पुलिस यह जानना चाहती है कि क्या यह केवल मानसिक बीमारी का मामला है या फिर इस ख़ामोशी के पीछे कोई सोची-समझी वारदात छिपी है.

पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जा रही है कि पिछले 5 महीनों के दौरान उदय भानु का व्यवहार कैसा था और क्या किसी ने प्रियंका की चीखें सुनी थीं. फिलहाल, पुलिस कानूनी विशेषज्ञों से राय ले रही है कि बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इस मामले में ठोस चार्जशीट कैसे दाखिल की जाए.