Sunday, April 5, 2026
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बडी खबरः 48 घंटे बाद ईरान पर टूटेगा कहर-पूरी दुनिया अलर्ट पर!..

बडी खबरः 48 घंटे बाद ईरान पर टूटेगा कहर-पूरी दुनिया अलर्ट पर!..

नई दिल्‍ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत को बड़ी चोट देने वाला है। इसका लंबा खिंचना हमारे लिए बहुत खराब है। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध लंबा चला तो भारत के ग्‍लोबल एक्‍सपोर्ट पर असर पड़ेगा। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यहां तक यह जल्‍दी खत्‍म भी हो गया तो इसका प्रभाव‍ कई महीने से लेकर कई साल तक बना रह सकता है। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शनिवार को इसे लेकर आगाह किया। इन चुनौत‍ियों से भारत को आत्मनिर्भरता ही बचा सकती है।

‘चिंतन शिविर-फार्मा एक्‍सपोर्ट ग्रोथ’ के अवसर पर हैदराबाद में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अग्रवाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पिछले महीने इंपोर्ट और एक्‍सपोर्ट दोनों पर निश्चित रूप से असर पड़ा। कारण है कि एनर्जी भारतीय आयात बाजार का एक प्रमुख हिस्सा है।

पश्च‍िम एश‍िया में भारत का क‍ितना न‍िर्यात?
वाणिज्‍य सचिव बोले, ‘पश्चिम एशिया भी एक महत्वपूर्ण बाजार है। हमारे निर्यात का लगभग 12-13 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है। लिहाजा, इस पर सीधा असर पड़ेगा। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो मुमकिन है कि दुनिया के अन्य हिस्सों में होने वाले हमारे निर्यात भी प्रभावित होंगे। कारण है कि कुछ वैल्‍यू चेन फिर से सामान्य स्थिति में आ जाएंगी। हम इस बात से अवगत हैं।’ एक सवाल का जवाब देते हुए अग्रवाल ने कहा कि इस संकट का वास्तविक प्रभाव आने वाले कुछ हफ्तों में स्पष्ट हो सकेगा।

सरकार क‍िस तरह की कोश‍िश में जुटी?
राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरकार कोशिश कर रही है कि सप्‍लाई चेन पर कम से कम असर पड़े। हालांकि, आयात और निर्यात दोनों में कुछ कमी आ सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही युद्ध समाप्त हो जाए, लेकिन इसका असर कुछ महीनों या सालों तक बना रह सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी सप्‍लाई चेन या इन्‍फास्‍ट्रक्‍चर प्रभावित हुआ है।

अग्रवाल के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए इंडस्‍ट्री को आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने बताया कि दवा क्षेत्र पर भी कुछ असर पड़ा है। खासकर जरूरी कच्चे माल और रसायनों की सप्‍लाई पर यह देखा गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी की सीमित उपलब्धता को प्राथमिकता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने के लिए काम कर रही है। जरूरत पड़ने पर अन्य स्रोतों से आयात भी किया जा रहा है।

me.sumitji@gmail.com

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