Friday, April 3, 2026
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युद्ध के बीच भारत को नहीं भूला दोस्त इजरायल, Negev के साथ AESA Radar की दनादन सप्लाई जारी!

युद्ध के बीच भारत को नहीं भूला दोस्त इजरायल, Negev के साथ AESA Radar की दनादन सप्लाई जारी!
हाल ही में खबर आई थी कि इजराइल की एक प्रमुख हथियार कंपनी ने भारत को नेगेव लाइट मशीन गन की पहली खेप सौंप दी। यह सब कुछ हुआ मेक इन इंडिया पहल को ध्यान में रखते हुए पिछले दो ढाई सालों से इजराइल जंग लड़ रहा है। पहले हमास और अब ईरान से उसकी जंग चल रही है। लेकिन इस बीच भी जो भारत इजराइल की हथियारों की डील हुई थी वो नहीं रुकी और नहीं रुकने का भी एक बड़ा कारण था क्योंकि यह सब कुछ मेक इन इंडिया पहल के तहत हुआ। दरअसल सबसे पहले जो खबर है वो आपको हम बता दें कि इंडियन आर्मी और आईएफ लंबे समय से अपनी पुरानी मशीन गन को बदलने की मांग कर रही थी और इसी बीच मेक इन इंडिया के तहत भारत को 2000 नेगेव 7.62 * 51 एलएजी की पहली खेप मिल गई। यह कुल 41,000 यूनिट्स का एक बहुत बड़ा ऑर्डर है। इसमें खास बात यह है कि यह बंदूके इजराइल में नहीं बल्कि भारत द्वारा तैयार की जा रही थी। यह टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसी साल 4000 और गन आएंगी और आने वाले समय में यह आंकड़ा 41,000 तक पहुंच जाएगा। अब आप यह सोच रहे होंगे कि बाजार में बहुत सी बंदूके हैं। 

भारत ने इस बंदूक को लेकर ही इजराइल के साथ क्यों डील की? ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। तो आपको बता दें नेगेव की स्पेसिफिकेशन थोड़ी सी अलग है। कल्पना कीजिए एक ऐसी मशीन गन की जो एक दीवार को गिरा सके। लेकिन उसका वजन इतना कम हो कि एक जवान उसे हाथ में लेकर पहाड़ों पर दौड़ सके। इस तरह की बंदूके पूरी दुनिया में बहुत कम है और जैसा कि इसकी खूबियां हैं। इसी को देखते हुए भारत ने इजराइल के साथ डील की थी। नेगेब अपनी कैटेगरी 7.62 एमm में दुनिया की सबसे हल्की बंदूकों में से एक है। पेनिट्रेशन पावर इसमें 7.62 * 51 एमm का नेटो स्टैंडर्ड वाला बारूद गोला इस्तेमाल होता है। यह इतनी शक्तिशाली है कि यह सिर्फ इंसानों को नहीं बल्कि ईंट की मजबूत दीवारों, सैंडबग के बंकरों और हल्के बख्तरबंद वाहनों को भी छलनी कर सकती है। इसमें एक स्विच होता है। अगर आप सेमी ऑटोमेटिक मोड पर हैं तो आप एक-एक करके सटीक निशाना लगा सकते हैं जैसे स्नाइपर करती है। अगर दुश्मन बड़ी तादाद में सामने हो तो इसे फुल्ली ऑटोमेटिक कर दीजिए। फिर यह प्रति मिनट सैकड़ों राउंड गोलियां बरसाकर दुश्मन को सिर उठाने का मौका नहीं देगी। 

युद्ध हमेशा दिन की रोशनी में नहीं होते। निगेव में ट्रिटियम नाइट साइट्स लगे हैं। यह खास लेंस होते हैं जो बिना किसी बैटरी या बाहरी लाइट के अंधेरे में भी चमकते हैं। जिससे सैनिकों को निशाना साधने में आसानी होती है। तो अब शायद आपको अंदाजा लग गया होगा कि भारत ने अपनी सेना के लिए ने यह बंदूक क्यों चुनी और वो भी जब यह बंदूक मेक इन इंडिया पहल के तहत बन रही हो तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। अच्छा हमने शुरुआत में पीएलआर सिस्टम की बात की थी। अडानी ग्रुप की बात की थी। तो आपको यह भी बता दें पीएलआर भारत की पहली ऐसी प्राइवेट कंपनी है जो छोटे हथियार और गोला बारूद बना रही है। यह इजराइल की कंपनी आईडब्ल्यूआई और भारत की अडानी ग्रुप का एक जॉइंट वेंचर है। देखिए पहले क्या होता था भारत सरकार के पास अपनी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां थी। लेकिन वहां अक्सर लेट लतीफी और क्वालिटी के मुद्दे रहते थे। 
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