अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी सेना ईरान में जल्द ही ‘काम खत्म कर देगी क्योंकि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने वाले हैं।’ ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ युद्ध में उनके लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ये लक्ष्य हैं ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता एवं नौसेना को नष्ट करना तथा यह सुनिश्चित करना कि उसके लिए काम करने वाले छद्म संगठन अब क्षेत्र को अस्थिर नहीं कर सकें और ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सके। ट्रंप ने ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में कहा कि यह सैन्य कार्रवाई तेल समेत ईरान के किसी विशाल संसाधन को हासिल करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि यह अमेरिका के सहयोगियों की मदद के लिए की गई है।
यूएस इजराइल पर ईरान के हमलों की 89वीं लहर की गई है। ईरान ने 100 से ज्यादा मिसाइलेंट दी है। 200 से ज्यादा ड्रोन से भी हमले हुए हैं। एक साथ यूएस और इजराइल के ठिकानों पर जबरदस्त अटैक हुआ है। ईरान ही नहीं हिजबुल्ला भी अपने हमलों से इजराइल को नुकसान पहुंचा रहा है। लेबनान की ओर से आती मिसाइलें इजराइल के कई शहरों में तबाही मचा रही है। दरअसल यह इजराइल का किरियात शमोना शहर है। जहां हजबुल्ला ने हमला किया है। हिजबुल्ला लड़ाकों की ओर से दागी गई मिसाइलों ने यहां भारी तबाही मचाई है। इस हमले में कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। ईरान अमेरिका के बीच शुरू हुई जंग अब इजराइल और ईरान हिजबुल्लाह तक रह गई है। तो देखिए ईरान अमेरिका नहीं बल्कि ब्रिटेन को भी अपना निशाना बना रहा है। ईरानी ड्रोन ने इराक में ब्रिटेन की ऑयल कंपनी पर हमला कर भारी नुकसान पहुंचा है। उत्तरी इराक में इरविल की तस्वीरें भी सामने आई है। जहां पर ब्रिटिश तेल और प्राकृतिक गैस की दिग्गज कंपनी बीपी का फ्यूल गोदाम है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जिस पर एक के बाद एक कई ईरानी ड्रोन ने हमला किया। हमले के बाद आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। हालांकि गनीमत रही कि इस हमले में किसी को चोट नहीं आई है।
ब्रिटेन ने सीमित समर्थन दिया जबकि फ्रांस और जर्मनी में तनाव कम करने पर फोकस किया है। यही कारण है ट्रंप इस युद्ध से जल्द से जल्द पीछा छुड़ाना चाह रहे हैं क्योंकि वह जानते हैं कि अगर युद्ध लंबा खींचा तो सबसे ज्यादा नुकसान उनका ही होगा क्योंकि ट्रंप अब इस युद्ध में पूरी तरह से अकेले पड़ गए हैं। मतलब साफ है पश्चिमी देशों का जो गठबंधन सालों से एक साथ खड़ा रहा वह अब हिल रहा है। एक तरफ अमेरिका अकेले जंग लड़ रहा है और अपने साथियों से नाराज है। दूसरी तरफ यूरोप, नाटो और खाड़ी के सहयोगी देश इस जंग को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ मान रहे हैं और इसमें शामिल होने को तैयार नहीं है। तो एक तरफ ट्रंप सरेंडर मोड में है तो वहीं ईरान घातक मोड में है। एक तरफ ट्रंप जंग रोकने की बात करें तो वहीं ईरान ने अब बहुत बड़े हमले की बात कही है।
तो वहीं ईरान ने अब बहुत बड़े हमले की बात कही है। जहां ईरान के टारगेट पर है अमेरिका के स्पेशल 18 जिसमें Sisco, HP, [संगीत] Intel, Oracle, Microsoft, Apple, Google, मेटा, आईबीm, डेल, एनvीडिया, JP मॉ्गन चेस, Tesla, जनरल इलेक्ट्रिक, Boeing जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये सभी नाम अमेरिका की उन कंपनियों के हैं जो उसकी शान मानी जाती हैं। जिनकी बदौलत ही अमेरिका टेक सुपर पावर बना हुआ है।






