Thursday, April 2, 2026
Politics

America में Iran War पर बदला जनमत, New Survey में 66% लोगों ने की युद्ध खत्म करने की मांग

America में Iran War पर बदला जनमत, New Survey में 66% लोगों ने की युद्ध खत्म करने की मांग
अमेरिका में ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर लोगों की सोच अब तेजी से बदलती नजर आ रही है और आम जनता इस लंबे खिंचते संघर्ष से बाहर निकलने की मांग कर रही है। ताजा सर्वे में यह संकेत मिला है कि लोग अब आर्थिक दबाव और बढ़ती महंगाई के कारण युद्ध समाप्त करने के पक्ष में झुक रहे हैं।
बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक करीब 66 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि सरकार को जल्द से जल्द इस युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए, भले ही सभी लक्ष्य हासिल न हो पाएं। वहीं करीब 27 प्रतिशत लोग अब भी यह चाहते हैं कि जब तक तय उद्देश्यों को पूरा न कर लिया जाए, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाए।
गौरतलब है कि यह संघर्ष अब दूसरे महीने में पहुंच चुका है और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों तक फैल चुका है। मौजूद जानकारी के अनुसार इस युद्ध के चलते हजारों लोगों की जान जा चुकी है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है, खासकर ऊर्जा कीमतों में तेजी के रूप में।
अमेरिका के अंदर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिल रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के समर्थकों के बीच भी राय बंटी हुई है, जहां एक तरफ कुछ लोग युद्ध जारी रखने के पक्ष में हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग जल्दी समाधान चाहते हैं।
सर्वे में यह भी सामने आया है कि सैन्य कार्रवाई को लेकर आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। करीब 60 प्रतिशत लोगों ने ईरान के खिलाफ की जा रही सैन्य कार्रवाई का विरोध किया है, जबकि लगभग 35 प्रतिशत लोग इसके समर्थन में हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि जनता के बीच युद्ध को लेकर असहजता बढ़ रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार आर्थिक असर इस पूरे मुद्दे का सबसे बड़ा कारण बनकर उभर रहा है। आधे से ज्यादा लोगों को आशंका है कि इस संघर्ष का उनकी निजी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बढ़ती ईंधन कीमतें लोगों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई हैं।
बता दें कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर को पार कर चुकी हैं और प्रति गैलन चार डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। यह बढ़ोतरी युद्ध शुरू होने के बाद सबसे ज्यादा मानी जा रही है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति में बाधा इसके पीछे की मुख्य वजह है।
गौरतलब है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे रोजमर्रा की चीजों जैसे खाद्य पदार्थ और परिवहन लागत भी प्रभावित होती हैं, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ जाता है।
वहीं सरकार के अंदर भी इस स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि अगर संघर्ष लंबा चलता है तो तेल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे आर्थिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
कुल मिलाकर स्थिति यह दर्शाती है कि युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है, और यही कारण है कि अमेरिका में युद्ध को लेकर जनमत तेजी से बदल रहा है, जो आने वाले समय में राजनीतिक फैसलों को भी प्रभावित कर सकता है।
me.sumitji@gmail.com

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