नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने वित्तीय बाजार में बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि साइबर सुरक्षा को अब केवल आईटी विभाग का विषय नहीं माना जा सकता, बल्कि यह बोर्ड स्तर, कारोबारी निरंतरता और बाजार की विश्वसनीयता से जुड़ा अहम मुद्दा है।

पांडे ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र आपस में तेजी से जुड़ रहा है। ऐसे में किसी एक संस्था पर होने वाला साइबर हमला उसके वेंडर, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म या थर्डपार्टी सेवा प्रदाताओं के जरिए पूरे इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है। इसलिए संस्थानों, नियामकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
क्वांटम कंप्यूटिंग पर भी SEBI की नजर
SEBI ने क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े भविष्य के साइबर जोखिमों को भी गंभीरता से लिया है। पांडे ने पोस्टक्वांटम क्रिप्टोग्राफी की दिशा में समय रहते तैयारी करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि आज सुरक्षित माना जा रहा डेटा भविष्य में शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों के जरिए डिक्रिप्ट किया जा सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसलिए क्वांटमसुरक्षित तकनीक को भविष्य की रिसर्च नहीं, बल्कि चरणबद्ध माइग्रेशन कार्यक्रम के रूप में देखना होगा।
बाजार से सुझाव ले रहा नियामक
SEBI साइबर सुरक्षा से जुड़े नियमों और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए बाजार के प्रतिभागियों से सुझाव भी ले रहा है। नियामक ने साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग और खतरे से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए नए प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं, ताकि किसी हमले की स्थिति में जानकारी तेजी से साझा हो और प्रतिक्रिया बेहतर तरीके से दी जा सके।
SEBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 202526 में साइबर सुरक्षा और क्वांटम रेजिलिएंसी को लेकर कई अभ्यास और कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने क्वांटम कंप्यूटिंग के प्रभाव और उससे निपटने की रणनीतियों पर चर्चा की।



