कार के इंजन को सही तापमान पर रखने में कूलेंट की बड़ी भूमिका होती है. इसके बावजूद ज्यादातर लोग कूलेंट का लेवल तब तक चेक नहीं करते, जब तक इंजन गर्म होकर परेशानी खड़ी न कर दे. कूलेंट पानी और एंटीफ्रीज का मिश्रण होता है, जो इंजन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने से बचाता है.

अगर कूलेंट का लेवल बहुत कम हो जाए या यह पूरी तरह खत्म हो जाए, तो इसका सीधा असर इंजन पर पड़ सकता है. इतना ही नहीं, ऐसी स्थिति ड्राइविंग के दौरान आपकी सुरक्षा के लिए भी परेशानी पैदा कर सकती है. आइए जानते हैं कि कूलेंट खत्म होने पर क्या करना चाहिए और इसकी कमी से कार में किस तरह की दिक्कतें आ सकती हैं.

कूलेंट खत्म हो जाए तो सबसे पहले क्या करें?

अगर करते समय आपको लगे कि इंजन जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है, तो सबसे पहले कार को सुरक्षित जगह पर रोक दें. इसके बाद इंजन बंद कर दें और उसे अच्छी तरह ठंडा होने का समय दें.गर्म इंजन पर तुरंत पानी डालना सही नहीं है. इससे इंजन के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए जल्दबाजी में बोनट खोलकर पानी डालने से बचें. इंजन के पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही रेडिएटर कैप खोलें.

इसके बाद जरूरत के हिसाब से कूलेंट डाला जा सकता है. अगर उस समय कूलेंट उपलब्ध नहीं है, तो आपात स्थिति में पानी का इस्तेमाल करके कार को नजदीकी सर्विस सेंटर तक ले जाने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि, सही कूलेंट भरवाना और समस्या की जांच कराना जरूरी है.

इंजन ओवरहीट होने का खतरा

कम होने या खत्म होने पर इंजन का तापमान तेजी से बढ़ सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे कार बीच रास्ते में बंद भी हो सकती है. अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इंजन को गंभीर नुकसान हो सकता है.

इसके अलावा, सड़क पर अचानक कार खराब होने से आपकी और आसपास मौजूद दूसरे लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है.

खराब हो सकता है हेड गैस्केट

कूलेंट की कमी के कारण इंजन जरूरत से ज्यादा गर्म हो सकता है. ज्यादा गर्मी की वजह से हेड गैस्केट खराब या फट सकता है. इसके बाद इंजन ऑयल और कूलेंट आपस में मिल सकते हैं, जिससे इंजन की समस्या और गंभीर हो सकती है.ऐसी खराबी को ठीक कराने में काफी खर्च आ सकता है. इसलिए कूलेंट की कमी को छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

वॉटर पंप पर भी पड़ सकता है असर

कूलेंट खत्म होने का असर वॉटर पंप पर भी पड़ सकता है. कूलेंट की कमी के कारण पंप को पर्याप्त लुब्रिकेशन और कूलिंग नहीं मिल पाती, जिससे उसमें घिसाव बढ़ सकता है.अगर समय पर इस समस्या को ठीक नहीं किया गया, तो वॉटर पंप खराब हो सकता है और उसे बदलवाने में अच्छाखासा खर्च आ सकता है.

थर्मोस्टेट खराब होने पर भी बढ़ता है तापमान

थर्मोस्टेट इंजन में कूलेंट के फ्लो को नियंत्रित करने का काम करता है. अगर इसमें खराबी आ जाए, तो कूलेंट सही तरीके से इंजन के अंदर घूम नहीं पाता. इसका नतीजा इंजन के ओवरहीट होने के रूप में सामने आ सकता है.इसलिए सिर्फ कूलेंट का लेवल देखना ही काफी नहीं है. समयसमय पर थर्मोस्टेट और पूरे कूलिंग सिस्टम की भी जांच कराना जरूरी है.

गर्मियों में क्यों ज्यादा सावधानी जरूरी?

भारत में गर्मियों के दौरान कार के इंजन के ज्यादा गर्म होने की समस्या बढ़ सकती है. बाहर का तापमान ज्यादा होने के साथ ट्रैफिक जाम और कार की खराब मेंटेनेंस जैसी वजहें भी इंजन पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं.

ऐसे में गर्मी शुरू होने से पहले ही कूलेंट का लेवल चेक करा लेना बेहतर है. साथ ही अगर कूलेंट बारबार कम हो रहा है, तो सिर्फ उसे भरते रहने के बजाय इसकी वजह की जांच करवानी चाहिए. इससे समय रहते बड़ी खराबी और महंगे रिपेयर से बचा जा सकता है.