private investment India : भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लगातार मजबूत बनाए रखना जरूरी होगा। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के चेयरमैन महेंद्र देव ने कहा है कि इस लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए निजी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर निवेश और निर्यात में वृद्धि बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नई दिल्ली में एफआईसीसीआई इंडिया के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए महेंद्र देव ने कहा कि विकसित भारत 2047 के विजन को पूरा करने के लिए देश की अर्थव्यवस्था को 7 से 8 प्रतिशत की वार्षिक विकास दर बनाए रखने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र का निवेश और निर्यात क्षमता में विस्तार आर्थिक विकास के प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए ढांचागत सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार दिया है। सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे, नीति सुधार और निवेश को बढ़ावा देने वाले कदमों से आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है।
भारत की जीडीपी वृद्धि में मजबूत प्रदर्शन :
सांख्यिकी मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 202526 की जनवरीमार्च तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। पूरे वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें कृषि, निर्माण और सेवा क्षेत्रों का अहम योगदान रहा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में द्वितीयक क्षेत्र में 8.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि सेवा क्षेत्र यानी तृतीयक क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। वहीं प्राथमिक क्षेत्र में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र की भूमिका रही।
इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से आर्थिक गतिविधियों को मिला समर्थन :
सरकार के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, भंडारण, वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विस जैसे क्षेत्रों में मजबूत विकास दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाईवे, रेलवे, पोर्ट और एयरपोर्ट जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सरकारी निवेश ने आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है।
कृषि क्षेत्र और निजी भागीदारी पर जोर :
एफआईसीसीआई के फसल पोषण से जुड़े कार्यक्रम में महेंद्र देव ने कहा कि ऐसे मंच किसानों, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार और बेहतर संसाधनों के इस्तेमाल की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्य के लिए कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। निजी निवेश, निर्यात विस्तार और आर्थिक सुधारों के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सरकार और नीति विशेषज्ञों का लगातार फोकस है।



