आसमान के बाद अब अकासा एयर इंडिगो और स्पाइसजेट को शेयर बाजार में भी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है. कंपनी का कहना है कि आईपीओ जरूर आएगा, लेकिन तब तक ये पक्का नहीं है. कंपनी के अनुसार कैरियर का आईपीओ अगले दो से 4 साल के बीच में आ सकता है. कंपनी के सीएफओ का कहना है कि कंपनी की ओर से कई टारगेट्स सेट किए गए हैं. वो टारगेट कितने पूरे होते हैं, उस पर डिपेंड करेगा कि आईपीओ कब तक आएगा. आइए आपको भी बताते हैं कि कंपनी के सीएफओ की ओर से आईपीओ को लेकर किस तरह का अपडेट दिया है.

अकासा एयर के आईपीओ की प्लानिंग

एयरलाइन कंपनी आकासा एयर के मुख्य वित्त अधिकारी अंकुर गोयल ने मंगलवार को कहा कि एयरलाइन अगले दो से चार साल में अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम लाने की योजना बना रही है, जो इसके विभिन्न लक्ष्यों पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा कि एयरलाइन का आईपीओ आएगा या नहीं यह कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि यह तय है और सवाल बस ये है कि आईपीओ आएगा कब तक. कंपनी ने अगस्त, 2022 में परिचालन शुरू किया था, जिसके बाद से यह धीरेधीरे अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. वर्तमान में एयरलाइन अंतरराष्ट्रीय शहरों के साथ ही कुल 34 गंतव्यों के लिए सेवाएं दे रहीं हैं. इस एयरलाइन के पास अभी 39 विमानों का बेड़ा है और 2032 तक इसका लक्ष्य अपने बेड़े में 226 विमानों को शामिल करना है.

कंपनी ने सेट किए हैं टारगेट्स

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि आईपीओ की समयसीमा विभिन्न कारोबारी लक्ष्यों की प्राप्ति पर निर्भर करेगी. इनमें कंपनी की कर पूर्व आय के स्तर पर लाभ में आना, नकदी प्रवाह को मजबूत करना और समग्र लाभप्रदता हासिल करना शामिल है. उन्होंने कहा कि आइपीओ लाना तय है, यह आएगा या नहीं ये सवाल ही नहीं बनता. सवाल यह बनता है कि यह कब तक आएगा, एयरलान सिर्फ आईपीओ लाने के लिए नहीं बनी हैं, बल्कि हमारा मकसद ऐसी कंपनी लाना है जिसका वास्तव में कोई मूल्य हो…

कमाई उम्मीद से बेहतर

घाटा झेल रही एयरलाइन का सितंबर, 2025 से मार्च, 2026 की अवधि में एबिटडा पॉजिटिव रहा है. गोयल ने कहा कि इस साल हमारा नुकसान पिछले साल के मुकाबले कम रहा है, जो यह बताता है कि आय, प्रति इकाई आय, प्रति इकाई लागत, एबिटडा या नकदी खपत हो सभी हमारी उम्मीद के मुताबिक बेहतर हो रहे हैं. गोयल ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में कंपनी की क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य है. अगले चार से पांच वर्षों में क्षमता वृद्धि 30 से 40 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद है.