प्रोस्टेट कैंसर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती केवल बीमारी नहीं, बल्कि इसके शुरुआती संकेतों को लेकर जागरूकता की कमी है. कई पुरुष यूरिन से जुड़ी परेशानियों को उम्र बढ़ने का पार्ट मानकर महीनों या सालों तक इसे नजरअंदाज करते रहते हैं. वहीं कुछ पुरुष प्रोस्टेट कैंसर का नाम सुनते ही यूरिन से जुड़े हर लक्षण को कैंसर से जोड़कर घबरा जाते हैं. दोनों सिचुएशन सही नहीं हैं. सबसे अहम ये है कि यूरिनरी लक्षण कैंसर नहीं होता, लेकिन लगातार बने रहने वाले बदलावों को बिना जांच के छोड़ना भी उचित नहीं है.

इस जरूरी टॉपिक पर टीवी9 ने डॉक्टर राजीव सूद से बातचीत की. एक्सपर्ट से जानें इससे जुड़ी जरूरी बातें…

यूरिन की हर प्रॉब्लम हमेशा प्रोस्टेट कैंसर नहीं

एक्सपर्ट कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्लैंड का आकार बढ़ना यानी Benign Prostatic Hyperplasia बहुत नॉर्मल है. इससे यूरिन का कम आना, यूरिन शुरू करने में टाइम लगना, बारबार यूरिन आना, रात में कई बार उठना या यूरिन के बाद भी ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस होना हो सकता है. इसी तरह यूरिनरी इंफेक्शन, प्रोस्टेटिटिस, ओवरएक्टिव ब्लैडर और डायबिटीज भी यूरिनरी फ्रीक्वेंसी या जल्दबाजी का कारण बन सकते हैं. इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर प्रोस्टेट कैंसर हो गया है, ये सोचना सही नहीं है.

प्रोस्टेट कैंसर को लेकर कब करें चिंता?

डॉक्टर कहते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत में कई पुरुषों में लक्षण ठीक से क्लीन नहीं होते. इसलिए सिर्फ यूरिन में परेशानी शुरू होने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है. जब बीमारी आगे बढ़ती है तो कुछ मामलों में पेशाब या सीमेन में खून भी आ सकता है. लगातार लोवर बैक, कूल्हों या पेल्विक एरिया में दर्द एडवांस डिजीज में दिखाई दे सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। हालांकि ये लक्षण दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं और इनका मतलब अपने आप कैंसर नहीं है.

उम्र और फैमिली हिस्ट्री को नजरअंदाज न करें

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा उम्र के साथ बढ़ता है. इसके अलावा जिन पुरुषों के पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर रहा है, उनमें जोखिम नॉर्मल पॉपुलेशन की तुलना में ज्यादा हो सकता है. इसलिए फैमिली हिस्ट्री वाले पुरुषों को अपने डॉक्टर से प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में पहले ही बातचीत करनी चाहिए. यह भी समझना जरूरी है कि पीएसए टेस्ट कोई कैंसर कंफर्म टेस्ट नहीं है. पीएसए बढ़ना एनलार्ज प्रोस्टेट या प्रोस्टेटिटिस जैसी सिचुएशन में भी हो सकता है.

वहीं केवल एक नॉर्मल पीएसए रिजल्ट के आधार पर हर व्यक्ति में कैंसर का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता. स्क्रीनिंग का फैसला उम्र, फैमिली हिस्ट्री, लक्षण, ओवरऑल हेल्थ और व्यक्तिगत खतरे को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.

पुरुषों को कब यूरोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए?

अगर यूरिन से जुड़ी समस्या नई है, लगातार बनी हुई है या धीरेधीरे बढ़ रही है, तो इसे केवल उम्र के साथ होने वाली प्रॉब्लम मानकर टालना नहीं चाहिए. खासकर रात में बारबार उठना, यूरिन की धार में लगातार बदलाव, यूरिन शुरू करने में कठिनाई, यूरिन में खून, अचानक तेजी से वजन घटना या लगातार कमर और पेल्विक एरिया में दर्द जैसे संकेतों पर डॉक्टरी इलाज जरूरी है.