दुनिया के कई देशों का झंडा भारत के तिरंगे से मिलता है. वो तिरंगा जो सिर्फ देश की पहचान ही नहीं, भारत के मूल्यों का विचारों का प्रतीक है. भारतीय तिरंगा चार हिस्सों से मिलकर बना है. तीन पट्टियां और अशोक चक्र. पट्टियों के तीनों रंगों में केसरिया साहस, त्याग और नि:स्वार्थ भावना का प्रतीक है. सफेद रंग शांति और सत्य का प्रतीक है. वहीं, हरा रंग समृद्धि, विकास और प्रकृति का प्रतीक है. सफेद पट्टी के बीच नीले रंगे का 24 तीलियों वाला चक्र नजर आता है. तिरंगे का जो वर्तमान स्वरूप है उसे पिंगली वेंकैया ने तैयार किया था और 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने अपनाया था.

जिन देशों का झंडा भारतीय तिरंगे से मिलताजुलता है, उसमें पहला देश आयरलैंड है. यहां के झंडे में तीन रंग है. केसरिया, सफेद ओर हरा.

तिरंगे जैसे आयरलैंड और आइवरी कोस्ट के फ्लैग

आयरलैंड झंडे में भी तिरंगे के रंग हैं, लेकिन इसकी बनावट में एक बड़ा अंतर है. बड़ा फर्क यह है कि आयरलैंड का झंडा खड़ी पट्टियों वाला है, जबकि भारत का झंडा हॉरिजॉन्टल है. आयरलैंड में हरा रंग झंडे के डंडे की तरफ रहता है, बीच में सफेद और सबसे बाहर नारंगी रंग होता है.

आयरलैंड का झंडा.

यही नहीं, आइवरी कोस्ट का झंडा भी लगभग आयरलैंड जैसा ही है, बस रंगों का क्रम उल्टा है. यहां के राष्ट्रीय ध्वज में तीन समान आकार की खड़ी पट्टियां हैं. बाईं ओर नारंगी, बीच में सफेद और दाईं ओर हरा रंग. इसे 3 दिसंबर 1959 को अपनाया गया था और इसका अनुपात 2:3 है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यह झंडा आयरलैंड के राष्ट्रीय ध्वज से काफी मिलताजुलता है, हालांकि दोनों में रंगों का क्रम अलग है.

आइवरी कोस्ट का झंडा.

नाइजर का झंडा कैसा?

अफ्रीकी देश नाइजर का झंडा भारत के तिरंगे से सबसे ज्यादा मिलताजुलता माना जाता है. इसमें भी ऊपर से नीचे तीन क्षैतिज पट्टियां हैं. सबसे ऊपर नारंगी , बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग. बीच की सफेद पट्टी के ठीक बीचोंबीच एक नारंगी रंग का गोला बना होता है, जो सूरज का प्रतीक है.

रंगों का क्रम और झंडे की बनावट इतनी मिलतीजुलती है कि दूर से देखने पर कई बार लोग इसे भारतीय झंडा समझ बैठते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि भारत के झंडे में बीच में नीले रंग का अशोक चक्र है, जबकि नाइजर के झंडे में नारंगी रंग का ठोस गोला है.

अफ्रीकी देश नाइजर का झंडा.

क्यों मिलते हैं इतने झंडे एकदूसरे से?

दरअसल दुनियाभर में तिरंगे झंडों का चलन 18वीं19वीं सदी की क्रांतियों से शुरू हुआ, खासकर फ्रांसीसी क्रांति के बाद. फ्रांस के झंडे से प्रेरित होकर कई देशों ने अपने राष्ट्रीय आंदोलनों और आजादी की लड़ाई के दौरान तीन रंगों वाला झंडा अपनाया, जो एकता, बलिदान और नई शुरुआत का प्रतीक बना.

भारतीय तिरंगा.

भारत का तिरंगा भी स्वतंत्रता संग्राम के दौर में इसी भावना से विकसित हुआ. केसरिया रंग साहस और त्याग का, सफेद रंग सच्चाई और शांति का, और हरा रंग समृद्धि व उर्वरता का प्रतीक माना गया. यही कारण है कि जिन देशों ने आज़ादी की लड़ाई या क्रांतिकारी बदलाव के दौर में अपना झंडा बनाया, उनमें से कई ने मिलतेजुलते रंग और तीनपट्टी वाला ढांचा अपनाया.