Student Protest: देश के अलगअलग राज्यों में स्कूली छात्रों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है. कहीं शिक्षक नहीं होने से छात्र और ग्रामीण स्कूल में तालाबंदी कर रहे हैं तो कहीं खराब खाना, दूषित पानी और गंदे शौचालयों को लेकर छात्र धरने पर बैठ गए. उत्तर प्रदेश में स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की कमी के खिलाफ करीब 1800 छात्रों ने प्रदर्शन किया. वहीं हमीरपुर में सड़क की बदहाली के खिलाफ बच्चों ने तिरंगा लेकर पांच किलोमीटर पैदल मार्च किया. झारखंड के गढ़वा में पसंदीदा शिक्षक के तबादले को लेकर शुरू हुआ छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन हिंसक हो गया और पुलिस पर पथराव तक पहुंच गया.

जालोर में 18 पद खाली, छात्रों ने स्कूल में जड़ा ताला

राजस्थान के जालोर जिले के मेंगलवा स्थित पीएम श्री स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी से परेशान विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामीणों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा. लोगों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और धरने पर बैठ गए. करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की. अधिकारियों ने तत्काल पांच शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था करने का फैसला लिया. साथ ही 10 दिनों के भीतर तीन और शिक्षकों की नियुक्ति का लिखित आश्वासन दिया. इसके बाद ग्रामीणों ने अपना धरना समाप्त कर दिया.

25 में से सिर्फ 7 कर्मचारी कर रहे काम

मेंगलवा के पीएम श्री स्कूल में कुल 25 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सात कर्मचारी ही कार्यरत हैं. यानी 18 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं. इनमें प्रधानाचार्य और उपप्रधानाचार्य जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं. स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और संस्कृत जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षकों की कमी है. यहां करीब 340 छात्रछात्राएं पढ़ते हैं. इनमें 160 बालिकाएं और 180 बालक हैं. इतने बड़े विद्यार्थियों के समूह की जिम्मेदारी सिर्फ कुछ शिक्षकों पर होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही थी.

खटीमा में खराब खाना और दूषित पानी को लेकर छात्र आंदोलन

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में भी छात्रों का विरोध सामने आया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। एकलव्य मॉडर्न आवासीय विद्यालय में छठी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर धरना शुरू कर दिया. छात्रों का आरोप था कि उन्हें लंबे समय से खराब और गुणवत्ताहीन खाना दिया जा रहा है. इसके अलावा पीने के पानी की गुणवत्ता भी ठीक नहीं थी और शौचालयों में सफाई का अभाव था. छात्रों ने स्कूल परिसर में एकजुट होकर नारेबाजी की.

मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया. मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्कूल की प्रधानाचार्य भारती यादव को पद से हटा दिया गया. खटीमा मुख्यमंत्री का गृह नगर होने के कारण इस मामले की चर्चा तेजी से फैल गई. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मामले की जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंचाई, जिसके बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की.

फतेहपुर में 1800 छात्रों ने खोला मोर्चा

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में भी छात्रों का गुस्सा देखने को मिला. करीब 1800 छात्रछात्राएं स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की कमी के विरोध में प्रदर्शन करने लगे. छात्रों की शिकायत थी कि स्कूल में पर्याप्त बिजली और पंखे नहीं हैं. कई जगह वायरिंग खराब है. पीने के लिए साफ पानी की समस्या है और शौचालयों की हालत भी खराब है. इसके अलावा मिडडे मील और बैठने के लिए पर्याप्त बेंच की व्यवस्था नहीं होने से भी छात्रों को परेशानी हो रही थी.

छात्रों का आरोप था कि उन्होंने कई बार स्कूल प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन समाधान नहीं हुआ. इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र स्कूल गेट पर जमा हुए और नारेबाजी शुरू कर दी. मामले की जानकारी मिलने पर जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया और छात्रों की समस्याओं को सुना. अधिकारियों ने संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल निर्देश जारी किए.

हमीरपुर में सड़क के लिए बच्चों ने हाथ में तिरंगा लेकर किया मार्च

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में मामला स्कूल की इमारत या शिक्षकों से नहीं, बल्कि सड़क से जुड़ा था. यहां चंदूपुर मार्ग की बदहाली को लेकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया. बच्चों और ग्रामीणों ने हाथों में तिरंगा लेकर करीब पांच किलोमीटर पैदल मार्च किया और कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांग रखी. ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक उनके गांव तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है.

चंदूपुर मार्ग जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर है और इससे एक दर्जन से अधिक गांव और मजरे जुड़े हुए हैं. बरसात के दिनों में कच्ची सड़क पर पानी और कीचड़ भर जाता है. इससे गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है. सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है. सड़क खराब होने के कारण कई बार बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में परेशानी होती है.

गढ़वा में शिक्षक के तबादले से शुरू हुआ आंदोलन हिंसक

झारखंड के गढ़वा जिले में छात्रों का विरोध सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति तक पहुंच गया. कांडी थाना क्षेत्र के प्लस टू उच्च विद्यालय में पदस्थापित लोकप्रिय शिक्षक मलय सिंह के तबादले के विरोध में छात्र पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. शुरुआत में आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन गुरुवार को स्थिति बिगड़ गई. छात्र सड़क जाम कर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान कांडी प्रखंड प्रमुख पिंकू पांडेय छात्रों को समझाने पहुंचे. आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और प्रखंड प्रमुख ने एक छात्र को थप्पड़ मार दिया. इसके बाद छात्र आक्रोशित हो गए. प्रदर्शनकारियों ने प्रखंड प्रमुख की गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी.

अलगअलग राज्यों में एक जैसी तस्वीर

राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और झारखंड की इन घटनाओं में भले ही मुद्दे अलगअलग हैं, लेकिन एक बात समान है स्कूली छात्र अब अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने से पीछे नहीं हट रहे हैं. कहीं शिक्षक नहीं हैं, कहीं स्कूल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, कहीं सड़क की समस्या बच्चों की पढ़ाई में बाधा बन रही है तो कहीं शिक्षक के तबादले को लेकर छात्र सड़क पर उतर आए.

इन घटनाओं ने स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाओं, साफसफाई, पेयजल और बेहतर शैक्षणिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. प्रशासन ने कई मामलों में तत्काल कार्रवाई की है, लेकिन इन प्रदर्शनों से यह भी साफ है कि समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने पर छात्रों और ग्रामीणों का असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है.