डेंगू को आमतौर पर तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी और प्लेटलेट्स में कमी से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन गंभीर डेंगू के कुछ मामलों में संक्रमण का असर शरीर के ब्लड फ्लो और दिमाग तक भी पहुंच सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डेंगू ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है? डॉ. प्रवीण गुप्ता, सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट के मुताबिक, डेंगू से जुड़े न्यूरोलॉजिकल कॉम्प्लिकेशन बहुत कम होते हैं, पर इंफेक्शन ज्यादा बढ़ जाए तो इसके लिए सतर्क रहना जरूरी है. डेंगू के दौरान शरीर में सूजन, ब्लड का बहना, डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर में बदलाव जैसी सिचुएशन बन सकती हैं. गंभीर मामलों में ये दिक्कतें दिमाग की हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती हैं.

डॉक्टर गुप्ता ने बताया, डेंगू को सीधे तौर पर स्ट्रोक की नॉर्मल वजह नहीं माना जाता, लेकिन गंभीर संक्रमण के दौरान कुछ ऐसी कंडीशन बन सकती हैं जो दिमाग की नसों को प्रभावित कर सकती हैं. बहुत कम मामलों में डेंगू के साथ इस्केमिक या हेमरेजिक स्ट्रोक जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं रिपोर्ट हुई हैं.

डेंगू में स्ट्रोक का खतरा कैसे बढ़ सकता है?

डेंगू के गंभीर संक्रमण में शरीर की सामान्य फिजियोलॉजी प्रभावित हो सकती है. एक तरफ प्लेटलेट्स कम होने और रक्तस्राव की समस्या हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर में बदलाव से मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

विशेषज्ञ बताते हैं कि डेंगू से संबंधित स्ट्रोक के मामले बेहद कम हैं और हर डेंगू मरीज को स्ट्रोक का खतरा नहीं होता. खासकर जिन मरीजों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्या है, उनमें किसी भी नए न्यूरोलॉजिकल लक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए.

कौन से लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं?

स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं. डेंगू से पीड़ित या हाल ही में ठीक हुए व्यक्ति में अगर अचानक इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए:

चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा या सुन्न होना

एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन

बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी

अचानक दिखाई देने में परेशानी

चलने में दिक्कत या शरीर का संतुलन बिगड़ना

अचानक बहुत तेज सिरदर्द

चक्कर, भ्रम या बेहोशी

डॉक्टर ने कहा, स्ट्रोक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। डेंगू के मरीज में न्यूरोलॉजिकल लक्षण आने पर केवल प्लेटलेट काउंट देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए. मरीज की पूरी जांच, न्यूरोलॉजिकल स्थिति और जरूरत पड़ने पर ब्रेन इमेजिंग के आधार पर कारण पता करना जरूरी है. घर पर दर्द की दवा देकर या प्लेटलेट बढ़ने का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है.

प्लेटलेट कम होना और स्ट्रोक क्या दोनों जुड़े हैं?

डेंगू में प्लेटलेट्स कम होना आम है, लेकिन कम प्लेटलेट्स का मतलब अपने आप स्ट्रोक होना नहीं है. बहुत कम प्लेटलेट्स होने पर रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है और गंभीर स्थिति में मस्तिष्क के अंदर ब्लीडिंग भी हो सकती है. दूसरी ओर, स्ट्रोक के अन्य कारणों में रक्त वाहिका में रुकावट या थक्का शामिल हो सकता है. इसीलिए डेंगू के दौरान मरीज को खुद से एस्पिरिन या अन्य ब्लडथिनिंग दवाएं शुरू नहीं करनी चाहिए. ऐसी दवाओं का इस्तेमाल मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर ही होना चाहिए.

विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू के ज्यादातर मरीज बिना किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या के ठीक हो जाते हैं. लेकिन बीमारी के दौरान या रिकवरी के समय अचानक दिखाई देने वाले न्यूरोलॉजिकल बदलावों को नजरअंदाज करना सही नहीं है. समय पर पहचान, उचित जांच और अस्पताल में तत्काल उपचार गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.