Sovereign Gold Bond: सोने में निवेश करना हमेशा से भारतीयों की पहली पसंद रहा है. यह सिर्फ एक पुरानी परंपरा नहीं है, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने की एक मजबूत गारंटी भी माना जाता है. अब भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से एक ऐसी खबर आई है, जिसने सरकारी गोल्ड स्कीम में पैसा लगाने वालों को मालामाल कर दिया है. अगर आपने भी कुछ साल पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश किया था, तो आपके लिए यह किसी जैकपॉट से कम नहीं है. 12 अगस्त 2026 से SGB 201819 सीरीज VI के निवेशकों को समय से पहले अपना पैसा निकालने का विकल्प मिल गया है. सबसे खास बात यह है कि इस निकासी पर निवेशकों को उनके मूल निवेश पर 361 प्रतिशत से भी ज्यादा का रिटर्न मिला है.

1 लाख का निवेश बना 4.61 लाख

जब हम अपनी गाढ़ी कमाई कहीं लगाते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि हमारा पैसा कितना बढ़ेगा. इस गोल्ड बॉन्ड के रिटर्न के आंकड़े वाकई हैरान करने वाले हैं. यह बांड 12 फरवरी 2019 को जारी किया गया था. जब यह सीरीज लॉन्च हुई थी, तब ऑनलाइन आवेदन करने वालों के लिए एक ग्राम सोने का इश्यू प्राइस 3,276 रुपये तय किया गया था . अब रिजर्व बैंक ने निकासी की नई कीमत 15,102 रुपये प्रति ग्राम निर्धारित कर दी है.

इसका सीधा मतलब है कि हर ग्राम पर निवेशकों को 11,826 रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है. बिना किसी चक्रवृद्धि ब्याज को जोड़े भी यह 361.11 फीसदी का उछाल है. इसे एक आसान उदाहरण से समझें, तो जिस व्यक्ति ने शुरुआत में ऑनलाइन माध्यम से 1 लाख रुपये का निवेश किया था, सोने की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण आज उसकी वैल्यू बढ़कर करीब 4.61 लाख रुपये हो चुकी है. ध्यान रखें कि इस बड़े मुनाफे में हर साल मिलने वाला 2.5 प्रतिशत का निश्चित ब्याज शामिल नहीं है, वह आपकी अतिरिक्त कमाई है.

कैसे तय होती है निकासी की यह कीमत

कई बार आम निवेशकों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह कीमत इतनी सटीक कैसे तय होती है. इसके पीछे आरबीआई के पारदर्शी नियम काम करते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। रिडेम्पशन का यह भाव इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा जारी 999 शुद्धता वाले सोने की कीमतों पर निर्भर करता है. पिछले तीन कारोबारी दिनों की क्लोजिंग प्राइस का एक साधारण औसत निकाला जाता है. इसी औसत के आधार पर यह नई कीमत 15,102 रुपये तय हुई है. नियमों के मुताबिक, गोल्ड बॉन्ड के जारी होने की तारीख से 5 साल पूरे होने के बाद ही ब्याज भुगतान की तारीख पर निवेशकों को अपना पैसा निकालने की छूट मिलती है.

मुनाफा निकालने से पहले समझें टैक्स का गणित

पैसा बनते देखना हर किसी को सुखद लगता है, लेकिन इससे जुड़े वित्तीय नियमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. अगर आप 12 अगस्त 2026 से अपने पैसे निकालने जा रहे हैं, तो टैक्स के नए नियमों पर जरूर गौर करें. 1 अप्रैल से लागू नए टैक्स नियमों के मुताबिक, अगर कोई निवेशक 8 साल की पूर्ण मैच्योरिटी अवधि से पहले अपना पैसा निकालता है, तो उसे इस मुनाफे पर नियमानुसार कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा. SGB में 5 साल पूरे होने के बाद, हर 6 महीने में ब्याज मिलने की तारीख पर पैसा निकालने की छूट मिलती है. चूंकि इस बांड का ब्याज हर साल फरवरी और अगस्त में मिलता है, इसलिए 12 अगस्त 2026 भी उसी प्रीमैच्योर निकासी की एक तारीख है.

टैक्स में पूरी तरह से छूट केवल उन्हीं मूल निवेशकों को मिलती है, जो पूरे 8 साल तक अपने बॉन्ड को होल्ड करके रखते हैं. इसके अलावा, जिन लोगों ने सीधे सरकार से बॉन्ड न खरीदकर बाद में शेयर बाजार से इसे खरीदा है, उन्हें 8 साल बाद भी टैक्सफ्री रिडेम्पशन का कोई फायदा नहीं मिलेगा. इसलिए, निकासी का अंतिम फैसला लेने से पहले अपने टैक्स स्लैब का आकलन जरूर कर लें.