भारत की आजादी के 79 वर्ष पूरे होने को हैं. 140 करोड़ से अधिक आबादी वाला यह देश केवल खुद आजाद नहीं हुआ. इस देश ने कई अन्य देशों को प्रेरणा दी. इसकी आजादी की घोषणा के बाद कई जगह आंदोलन तीखे रूप में सामने आए. नतीजा यह हुआ कि उनके संघर्ष के सामने भी उपनिवेशवाद ने घुटने टेके और पूरी दुनिया के नक्शे पर लगभग 118 संप्रभु देश सामने आए. संख्या में थोड़ा अंतर हो सकता है लेकिन यह सत्य है कि गुलामी से आजादी की ओर बढ़ने वाले देशों की संख्या खूब रही है. किसी को ब्रिटेन से आजादी मिली तो किसी को फ्रांस, पुर्तगाल और अन्य से. एक समय था जब यूरोपीय देशों ने दुनिया के अनेक हिस्सों पर लगभग कब्जा सा कर रखा था.

आइए, भारत के आजादी की वर्षगांठ के बहाने समझते हैं कि हमारी आजादी के बाद पूरी दुनिया के कितने देश आजाद हुए? आज वहां के हालात क्या हैं?

आजादी की लहर और भारत

भारत की आजादी केवल एक देश की राजनीतिक जीत नहीं थी. यह एशिया, अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों के लिए प्रेरणा बनी. 1947 के बाद उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष तेज हुआ. कई देशों ने ब्रिटेन, फ्रांस, नीदरलैंड, पुर्तगाल, बेल्जियम और दूसरे यूरोपीय साम्राज्यों से मुक्ति पाई. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोपीय शक्तियां कमजोर हो चुकी थीं. उनके लिए दूरदराज के उपनिवेशों को नियंत्रित करना कठिन हो गया था. स्थानीय जनता भी अब राजनीतिक अधिकार, पहचान और स्वशासन चाहती थी. इसी दौर में संयुक्त राष्ट्र का प्रभाव बढ़ा. आत्मनिर्णय का विचार मजबूत हुआ. भारत ने भी इस प्रक्रिया को नैतिक समर्थन दिया. भारत के नेताओं ने उपनिवेशवाद का विरोध किया. एशियाई और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग बढ़ा. बाद में गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने भी नए देशों को एक साझा मंच दिया.

माउंटबेटन ने 15 अगस्त की तारीख भारत की आज़ादी के लिए चुनी. फोटो: PTI

पहला बड़ा दौर: एशिया में नई आजादी

भारत के बाद एशिया में कई देशों ने स्वतंत्रता प्राप्त की. म्यांमार 1948 में ब्रिटिश शासन से मुक्त हुआ. उसी वर्ष श्रीलंका भी स्वतंत्र हुआ. मलेशिया 1957 में स्वतंत्र बना. मालदीव ने 1965 में ब्रिटिश संरक्षण व्यवस्था से मुक्ति पाई. बांग्लादेश 1971 में एक लंबे और दर्दनाक युद्ध के बाद स्वतंत्र हुआ. भारत ने उसके मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पूर्वी तिमोर, जिसे आज तिमोरलेस्ते कहा जाता है, 2002 में स्वतंत्र हुआ. यह 21वीं सदी में स्वतंत्र बनने वाले प्रमुख देशों में है. एशिया में स्वतंत्रता का अर्थ केवल झंडा बदलना नहीं था. नए देशों को सीमाओं, भाषाओं, जातीय पहचान और आर्थिक विकास की चुनौतियों से भी जूझना पड़ा.

मालदीव ने 1965 में ब्रिटिश संरक्षण व्यवस्था से मुक्ति पाई. फोटो: Pexels

अफ्रीका: आजादी का सबसे बड़ा केंद्र

भारत के बाद सबसे अधिक देश अफ्रीका में स्वतंत्र हुए. 1950 और 1960 का दशक अफ्रीकी स्वतंत्रता का दौर था. खासकर 1960 को अफ्रीका का वर्ष कहा जाता है. उस वर्ष अनेक अफ्रीकी देशों ने स्वतंत्रता प्राप्त की. घाना 1957 में स्वतंत्र हुआ. यह उपसहारा अफ्रीका के शुरुआती स्वतंत्र देशों में था. नाइजीरिया, कांगो, सेनेगल, सोमालिया, माली, नाइजर, चाड, गैबॉन और कई अन्य देश 1960 के आसपास स्वतंत्र हुए. अल्जीरिया ने फ्रांस के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद 1962 में आजादी पाई. केन्या 1963 में स्वतंत्र हुआ. जाम्बिया और मलावी 1964 में स्वतंत्र बने. अंगोला और मोजाम्बिक ने 1975 में पुर्तगाली शासन से मुक्ति पाई. नामीबिया 1990 में स्वतंत्र हुआ. दक्षिण सूडान 2011 में स्वतंत्र बना और इसे दुनिया का सबसे नया व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त देश माना जाता है.

नाइजीरिया, कांगो, सेनेगल, सोमालिया, माली, नाइजर, चाड, गैबॉन और कई अन्य देश 1960 के आसपास स्वतंत्र हुए. फोटो: Pexels

कैरेबियन और प्रशांत के छोटे देश

भारत के बाद कैरेबियन क्षेत्र में भी कई छोटे देश स्वतंत्र हुए. जमैका और त्रिनिदाद एवं टोबैगो 1962 में आजाद हुए. गुयाना 1966 में स्वतंत्र हुआ. बारबाडोस भी 1966 में स्वतंत्र हुआ. बहामास को 1973 में आजादी मिली. ग्रेनेडा, डोमिनिका, सेंट लूसिया और सेंट किट्स एवं नेविस जैसे छोटे द्वीपीय देश भी बाद के वर्षों में स्वतंत्र घोषित हुए. प्रशांत महासागर क्षेत्र में फिजी, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीप, वानुआतु, किरिबाती, तुवालू, मार्शल द्वीप और पलाऊ जैसे देश स्वतंत्र हुए. इन देशों की आबादी कम है. इनके संसाधन सीमित हैं. फिर भी इनका समुद्री क्षेत्र बहुत बड़ा है. जलवायु परिवर्तन इनके लिए सबसे गंभीर चुनौती है.

सोवियत संघ और यूगोस्लाविया का विघटन

1991 के बाद दुनिया का राजनीतिक नक्शा फिर बदला. संघ टूट गया. उससे एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया, यूक्रेन, जॉर्जिया, कजाखस्तान, उज़्बेकिस्तान, आर्मेनिया, अज़रबैजान और कई अन्य देश स्वतंत्र हुए या अपनी स्वतंत्रता पुनः स्थापित की. इसी तरह यूगोस्लाविया के टूटने से स्लोवेनिया, क्रोएशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, उत्तर मैसेडोनिया, मोंटेनेग्रो तथा सर्बिया जैसे देश अलग राजनीतिक इकाइयों के रूप में उभरे. इसी वजह से कुल संख्या में थोड़ा अंतर आता है.

कैसी है इन देशों की आज की स्थिति?

आज स्वतंत्र हुए देशों की स्थिति एक जैसी नहीं है. कुछ देश तेज आर्थिक विकास कर रहे हैं. कुछ लोकतंत्र को मजबूत बना रहे हैं. कुछ अब भी युद्ध, गरीबी, अस्थिरता और जलवायु संकट से जूझ रहे हैं. सिंगापुर एक सफल उदाहरण है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। 1965 में स्वतंत्र होने के बाद उसने व्यापार, शिक्षा, बंदरगाह और तकनीक के आधार पर मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई. संयुक्त अरब अमीरात, कतर और बहरीन जैसे देश तेल, गैस, व्यापार तथा वैश्विक निवेश के कारण समृद्ध हुए हैं. बांग्लादेश ने कपड़ा उद्योग, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास में उल्लेखनीय प्रगति की. हालांकि, उसे जलवायु परिवर्तन, बाढ़ और घनी आबादी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

अफ्रीका में रवांडा, बोत्सवाना और मॉरीशस को विकास और प्रशासन के सकारात्मक उदाहरणों में गिना जाता है. दूसरी ओर, दक्षिण सूडान, सोमालिया, सूडान और कांगो लोकतांत्रिक अस्थिरता, हिंसा, विस्थापन तथा आर्थिक संकट जैसी कठिनाइयों से जूझ रहे हैं. यूक्रेन, जॉर्जिया और कुछ अन्य पूर्व सोवियत देश सुरक्षा और भूराजनीतिक तनाव का सामना कर रहे हैं. कई छोटे द्वीपीय देश समुद्रस्तर बढ़ने, तूफानों और पर्यावरणीय नुकसान से चिंतित हैं.

इस तरह कहा जा सकता है कि भारत की स्वतंत्रता के बाद दुनिया ने उपनिवेशवाद के अंत का बड़ा दौर देखा. लगभग 118 देशों का स्वतंत्र होना मानव इतिहास की महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं में शामिल है. यह प्रक्रिया हर जगह शांतिपूर्ण नहीं थी. कई देशों को संघर्ष करना पड़ा. कई जगह युद्ध हुए. कई समाजों ने भारी कीमत चुकाई. फिर भी इन देशों की आजादी ने दुनिया को अधिक बहुध्रुवीय बनाया. एशिया, अफ्रीका, कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र की आवाज वैश्विक मंच पर मजबूत हुई. भारत की आजादी इस व्यापक परिवर्तन की एक प्रेरक घटना थी.