किसानों को खेती के लिए पैसे की जरूरत अक्सर बुआई से लेकर फसल की कटाई तक पड़ती है. बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि उपकरणों पर होने वाला खर्च कई बार किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC योजना शुरू की है.

किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को खेती और उससे जुड़ी दूसरी गतिविधियों के लिए बैंक से कर्ज मिल सकता है. इस योजना की शुरुआत अगस्त 1998 में हुई थी. शुरुआत में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से फसल की खेती के लिए होने वाले खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता था. बाद में इसके दायरे में डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया.
KCC पर कितना सस्ता मिलता है लोन?
KCC की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम ब्याज दर है. संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना के तहत बैंकों को किसानों को 3 लाख रुपये तक के पात्र KCC लोन पर 7 फीसदी सालाना की दर से कर्ज देने में सहायता दी जाती है. अगर किसान समय पर अपना लोन चुका देता है तो उसे सरकार की ओर से 3 फीसदी की एक्स्ट्रा ब्याज छूट मिल सकती है. इस तरह समय पर भुगतान करने वाले किसान के लिए प्रभावी ब्याज दर 4 फीसदी सालाना तक हो सकती है. यह ब्याज लाभ नियमों और पात्रता के आधार पर मिलता है. इसलिए किसान को अपने बैंक से मौजूदा शर्तों और ब्याज सब्सिडी की जानकारी जरूर लेनी चाहिए.
कौन ले सकता है KCC का फायदा?
KCC योजना का लाभ खेती करने वाले कई तरह के किसान उठा सकते हैं. इसमें अपनी जमीन पर खेती करने वाले किसान शामिल हैं. इसके अलावा पट्टे पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसान और बटाईदार भी पात्र हो सकते हैं. किसानों के स्वयं सहायता समूह यानी SHG और संयुक्त देयता समूह यानी JLG भी इस योजना के दायरे में आ सकते हैं. इसके अलावा पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़े लोग भी KCC के लिए आवेदन कर सकते हैं. संशोधित ब्याज सब्सिडी का लाभ लेने के लिए बैंक खाते को आधार से लिंक करना जरूरी हो सकता है.
कितने रुपये तक का KCC लोन मिल सकता है?
KCC के तहत मिलने वाली लोन लिमिट हर किसान के लिए एक जैसी नहीं होती. यह किसान की जमीन, फसल, खेती के क्षेत्रफल और जरूरत के आधार पर तय की जाती है. फसल की खेती और कटाई के बाद होने वाले खर्चों के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये तक की क्रेडिट सीमा का प्रावधान है. वहीं पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, रेशम पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों के लिए वर्किंग कैपिटल की सीमा अधिकतम 2 लाख रुपये तक हो सकती है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए फ्लेक्सी KCC की सुविधा भी उपलब्ध है. 1 हेक्टेयर तक की जमीन वाले कुछ किसानों के लिए 10,000 से 50,000 रुपये तक की फ्लेक्सी KCC सीमा हो सकती है.
KCC की लिमिट कैसे तय होती है?
KCC में क्रेडिट लिमिट आमतौर पर 5 साल की अवधि के लिए तय की जाती है. यह एक तरह की रिवॉल्विंग क्रेडिट लिमिट होती है, यानी किसान जरूरत के हिसाब से तय सीमा के भीतर पैसे निकाल सकता है और वापस जमा कर सकता है. पहले साल की सीमा तय करते समय फसल की अनुमानित लागत, खेती का क्षेत्रफल, कटाई के बाद का खर्च, घरेलू जरूरतें, खेत की संपत्ति के रखरखाव और बीमा प्रीमियम जैसी चीजों को ध्यान में रखा जाता है. इसके बाद दूसरे से पांचवें साल तक लागत बढ़ने को ध्यान में रखते हुए क्रेडिट लिमिट में हर साल 10 फीसदी तक बढ़ोतरी का प्रावधान है. खेती के लिए जमीन सुधार, सिंचाई व्यवस्था या कृषि उपकरण खरीदने जैसी जरूरतों के लिए टर्म लोन भी KCC में जोड़ा जा सकता है.
KCC का पैसा किन कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं?
KCC का इस्तेमाल सिर्फ गेहूं, धान या दूसरी मौसमी फसलों तक सीमित नहीं है. किसान इसका इस्तेमाल सब्जियों, फलों, फूलों, मसालों, औषधीय पौधों और दूसरी फसलों की खेती के लिए कर सकते हैं. फसल कटने के बाद होने वाले खर्चों के लिए भी KCC का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद यानी eNWR के आधार पर भी कर्ज लेने की सुविधा मिल सकती है. इसका एक फायदा यह भी है कि किसान फसल कटते ही मजबूरी में कम कीमत पर अपनी उपज बेचने से बच सकता है. पंजीकृत गोदाम में रखी फसल के बदले मिलने वाली रसीद पर कुछ परिस्थितियों में 6 महीने तक ब्याज सब्सिडी का लाभ मिल सकता है. प्राकृतिक आपदा से फसल प्रभावित होने पर फसल ऋण के पुनर्गठन की स्थिति में भी नियमों के अनुसार ब्याज सब्सिडी का लाभ मिल सकता है.
KCC कहां से बनवा सकते हैं?
किसान KCC के लिए कई तरह के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में आवेदन कर सकते हैं. इनमें सरकारी बैंक, निजी क्षेत्र के पात्र बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, ग्रामीण सहकारी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और कंप्यूटरीकृत प्राथमिक कृषि ऋण समितियां शामिल हैं.
KCC के लिए कैसे करें आवेदन?
KCC के लिए किसान अपने नजदीकी बैंक की शाखा में जाकर आवेदन कर सकते हैं. कई बैंक ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी देते हैं. आवेदन के दौरान आम तौर पर पहचान पत्र, आधार कार्ड, निवास प्रमाण, जमीन के दस्तावेज या पट्टेदारी से जुड़े कागज और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे जा सकते हैं. बैंक किसान की पात्रता और दस्तावेजों की जांच करता है. जांच पूरी होने के बाद पात्र किसान को KCC जारी किया जा सकता है. किसान को आवेदन करने से पहले अपने बैंक से ब्याज दर, सब्सिडी, लोन लिमिट, जरूरी दस्तावेज और भुगतान की शर्तों की ताजा जानकारी जरूर लेनी चाहिए.



