दतिया उपचुनाव में हार के बाद मध्य प्रदेश बीजेपी ने बड़ा संगठनात्मक फैसला लिया है. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर दतिया जिला बीजेपी की पूरी कार्यकारिणी भंग कर दी गई है. अब सबसे बड़ा सवाल पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर है. हर कोई जानना चाहता है कि क्या उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई होगी? इस संबंध में TV9 भारतवर्ष ने बीजेपी नेताओं से बात की. नेताओं का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा के मामले में फैसला मध्य प्रदेश बीजेपी नहीं, बल्कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा. प्रदेश इकाई ने अपनी रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है और अब अंतिम निर्णय हाईकमान ही लेगा.

टिकट कटते ही कार्रवाई के संकेत मिल गए थे
जैसे ही दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को बीजेपी का उम्मीदवार बनाया गया, दतिया बीजेपी की पूरी कार्यकारिणी ने इस्तीफा दे दिया. समर्थकों ने करीब 11 घंटे तक चक्का जाम किया और राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित रखा.
हालांकि अगले ही दिन प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सभी इस्तीफे अस्वीकार कर दिए थे, लेकिन उसी समय यह संकेत मिल गए थे कि चुनाव के बाद अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी. आखिरकार चुनाव परिणाम आने के अगले ही दिन पूरी जिला कार्यकारिणी भंग कर दी गई.
चक्का जाम के दौरान नरोत्तम रहे खामोश, अपना बूथ भी हारे
टिकट कटने के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने 11 घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम किया. इस दौरान जिला बीजेपी के पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे भी दिए, लेकिन नरोत्तम मिश्रा ने तत्काल कोई सार्वजनिक अपील नहीं की. अगले दिन उन्होंने केवल इतना कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है और सभी से शांति बनाए रखने की अपील की.
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम को भी अनुशासनहीनता के दायरे में माना गया है. वहीं उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी, नरोत्तम मिश्रा के बूथ से भी चुनाव हार गए. राजनीतिक गलियारों में इसे इस बात के संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर पार्टी प्रत्याशी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका.
नरोत्तम मिश्रा और आशुतोष तिवारी से मुलाकात
चुनाव नतीजों के बाद आज बुधवार को नरोत्तम मिश्रा और दतिया से बीजेपी के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की मुलाकात हुई है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। नरोत्तम मिश्रा ने इस मुलाकात पर पोस्ट करते हुए लिखा, दतिया उपचुनाव के बाद सोशल मीडिया पर मेरे और बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लेकर जो भ्रामक और असत्य बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं. आशुतोष तिवारी मेरे अनुज हैं. उनके प्रति मेरे मन में हमेशा स्नेह और आत्मीयता रही है, और आगे भी रहेगी. हमारे बीच न कभी कोई कटुता थी, न आज है. आज भी हमारी मुलाकात हमेशा की तरह उसी गर्मजोशी और अपनत्व के साथ हुई.
नरोत्तम मिश्रा ने आगे लिखा, आशुतोष भारतीय जनता पार्टी के एक कर्मठ, समर्पित और मेहनती कार्यकर्ता हैं. मेरे चुनाव 2003 डबरा से मैने उन्हें एक ईमानदार कार्यकर्ता के रूप में ही देखा है. मैंने वर्षों से उनकी कार्यशैली को करीब से देखा है. मुझे पूरा विश्वास है कि वे संगठन और जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे. आशुतोष ने भी परिणाम के पश्चात किसी का नाम लेकर नाराज़गी नहीं जताई यह भी सभी कार्यकर्ताओं के प्रति उनके मन में सम्मान के भाव का प्रकटीकरण है. मैं अपने सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूं कि वे ऐसा कोई कार्य, टिप्पणी या व्यवहार न करें जिससे पार्टी, संगठन या आशुतोष को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचे. हमारी ताकत हमारी एकजुटता, अनुशासन और संस्कार हैं.
उन्होंने लिखा, आशुतोष तिवारी और मेरे बीच 25 वर्षों का पारिवारिक रिश्ता है. वह सदैव मेरे अनुज हैं, उनके लिए मैं अभिभावक.. हमारा और उनका यह रिश्ता सदैव ऐसे ही बना रहेगा. राजनीति में उतारचढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन परिवार, संस्कार और रिश्ते हमेशा स्थायी रहते हैं.



