UP Link Expressway: उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा देने के लिए योगी सरकार ने दो बड़े फैसले लिए हैं. एक ओर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 74.47 किलोमीटर लंबे ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी गई है, वहीं दूसरी ओर जमीन और संपत्ति की खरीदफरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है. अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसके मालिकाना हक की जांच अनिवार्य होगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी गई है. यह नया ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे शुरुआत में 6 लेन का बनाया जाएगा, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तार देने की योजना है.

परियोजना के लिए शुरुआती बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार का मानना है कि इस लिंक एक्सप्रेसवे के बनने के बाद जेवर एयरपोर्ट से दिल्लीएनसीआर, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच सड़क संपर्क और मजबूत होगा. यात्रियों के साथसाथ उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा.

न्यू नोएडा को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा प्रस्तावित न्यू नोएडा क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है. करीब 74 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे का लगभग 20 किलोमीटर हिस्सा न्यू नोएडा क्षेत्र से होकर गुजरेगा. सरकार न्यू नोएडा को एक हाईटेक औद्योगिक और आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित कर रही है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके लिए ग्रेटर नोएडा और बुलंदशहर क्षेत्र के करीब 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है. न्यू नोएडा का कुल क्षेत्रफल करीब 209 वर्ग किलोमीटर प्रस्तावित है.

मास्टर प्लान के अनुसार न्यू नोएडा का विकास वर्ष 2041 तक चार चरणों में किया जाएगा. पहले चरण में करीब 3165 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित होगा. दूसरे चरण में 3798 हेक्टेयर, तीसरे चरण में 5908 हेक्टेयर और चौथे चरण में करीब 8230 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास किया जाएगा.

उद्योग, रोजगार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार

जेवर एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे के जुड़ने से ग्रेटर नोएडा, दादरी, बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. निर्यात करने वाली कंपनियों, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, ईकॉमर्स, रियल एस्टेट और सेमीकंडक्टर सेक्टर को इसका सीधा फायदा मिल सकता है.

गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़े मेरठ, प्रयागराज, शाहजहांपुर, हरदोई और उन्नाव जैसे शहरों के लिए भी जेवर एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होगी. सरकार ने वर्ष 202627 के लिए नोएडा में हाईटेक विकास, निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच बनने वाला यह लिंक जेवर एयरपोर्ट को तेज और सीधी कनेक्टिविटी देगा. न्यू नोएडा क्षेत्र में रोटरी इंटरचेंज विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है.

अब जमीन खरीदने से पहले होगी मालिकाना हक की जांच

उत्तर प्रदेश विधानसभा ने स्टांप एवं पंजीयन विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दे दी है. इनमें सबसे बड़ा बदलाव संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया में किया गया है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले उसके वास्तविक मालिकाना हक की जांच की जाएगी. इसका उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाली जमीन की धोखाधड़ी को रोकना और खरीदारों के हितों की सुरक्षा करना है.

पहले खरीदारों पर होती थी जांच की जिम्मेदारी

अब तक रजिस्ट्री के दौरान मुख्य रूप से संपत्ति के मूल्य, सर्किल रेट और राजस्व संबंधी जानकारी की जांच की जाती थी. संपत्ति का असली मालिक कौन है, इसकी पूरी पड़ताल करना खरीदार की जिम्मेदारी होती थी.

इसी कमी का फायदा उठाकर कई मामलों में एक ही जमीन को अलगअलग लोगों को बेचने जैसे मामले सामने आते रहे हैं. नई व्यवस्था से ऐसे मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

रजिस्ट्री से पहले जांचे जाएंगे दस्तावेज

नए प्रावधान के तहत रजिस्ट्री कार्यालय में संपत्ति से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाएगी. इसमें पुरानी रजिस्ट्री, खसराखतौनी और अन्य राजस्व रिकॉर्ड शामिल होंगे. अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही संपत्ति का पंजीकरण पूरा किया जाएगा. इससे फर्जी रजिस्ट्री और विवादित संपत्तियों की बिक्री पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा.

दान की संपत्ति के नियमों में भी बदलाव

विधानसभा से पारित दूसरे विधेयक में दान के रूप में दी जाने वाली संपत्तियों के निबंधन शुल्क को सर्किल रेट से जोड़ने का प्रावधान किया गया है. सरकार का मानना है कि इससे दान के नाम पर होने वाली राजस्व अनियमितताओं पर रोक लगेगी और सरकारी आय में भी पारदर्शिता आएगी.

सरकार के अनुसार, मालिकाना हक की जांच से जुड़ा विधेयक केंद्रीय कानून में संशोधन से संबंधित है. इसलिए इसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा. केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश में लागू हो सकेगी.

दोनों फैसलों को प्रदेश में विकास और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. जहां एक ओर एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, वहीं संपत्ति खरीदने वालों को नए कानून से सुरक्षा मिलने की उम्मीद है.