सिंगर Sona mohapatra ने बॉलीवुड की म्यूजिक इंडस्ट्री की आलोचना करते हुए कहा है कि दिल टूटने और रोमांटिक गाने ज्यादातर पुरुष गायकों के लिए ही होते हैं।

सिंगर सोना महापात्रा ने बॉलीवुड म्यूजिक में जेंडर असंतुलन पर चर्चा शुरू की है। उनका कहना है कि दिल टूटने वाले गाने अक्सर पुरुष गायकों के लिए होते हैं, जबकि महिला गायिकाओं को पीछे रखा जाता है।

अरिजीत सिंह के ‘जालिमा’ गाने का दिया उदाहरण

अरिजीत सिंह के मशहूर गाने ‘जालिमा’ का उदाहरण देते हुए, उन्होंने सवाल उठाया कि डुएट गानों में महिला गायिकाओं को अक्सर कम जगह क्यों मिलती है। उन्होंने तर्क दिया कि यह ट्रेंड इंडस्ट्री में रिप्रेजेंटेशन से जुड़ी एक बड़ी समस्या को दिखाता है।

दर्द भरे गीत सिर्फ पुरुषों के लिए

MBI फेस्टिवल ऑफ लेटर्स में अपना अनुभव बताते हुए सोना ने कहा, ‘बॉलीवुड में दिल टूटने वाले सभी गाने पुरुषों के लिए ही होते हैं। पुरुषों का भी दिल टूटता है; आजकल के पुरुष भी प्यार महसूस करते हैं। क्योंकि जब भी मुझे डुएट गाने के लिए बुलाया जाता था, तो अक्सर आखिरी कोरस मुझे ही गाना होता था। आपको ‘जालिमा’ गाना जरूर सुनना चाहिए। यह अरिजीत का गाना है; जब मुझे इसे गाने के लिए बुलाया गया, तो मैं हैरान रह गई थी’।

50 साल की इस सिंगर ने सवाल उठाया कि जिन गानों को डुएट के तौर पर प्रमोट किया जाता है, उनमें अक्सर महिला गायिकाओं को कम जगह क्यों दी जाती है।

प्रीतम से पूछा था सवाल

इसमें अरिजीत की कोई गलती नहीं है; वह एक बेहतरीन कलाकार हैं। लेकिन महिला गायिका को आखिर में क्यों लाया जाता है? प्रीतम से मेरा सवाल था, ‘क्या पुरुष गायक खुद से ही प्यार कर रहा है? यह कैसा डुएट है? मैं आखिर में क्यों आती हूं?’

सोना ने बाद में अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कमेंट सेक्शन में बातचीत जारी रखी। सोना ने इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रहे एक ट्रेंड की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि समस्या यह नहीं है कि महिलाओं ने कभी दिल टूटने वाले गाने नहीं गाए, बल्कि यह है कि बॉलीवुड ने धीरेधीरे ऐसे गाने बनाना कम कर दिया।

‘जालिमा’ गाना अरिजीत सिंह और हर्षदीप कौर ने 2017 की फिल्म ‘रईस’ के लिए गाया था। इस गाने में शाहरुख खान और माहिरा खान नजर आए थे और यह फिल्म के सबसे लोकप्रिय गानों में से एक बन गया था।