आजकल कई लोग नौकरी के बीच 12 साल का करियर ब्रेक लेते हैं. कोई उच्च शिक्षा के लिए नौकरी छोड़ता है, कोई परिवार की जिम्मेदारियों के कारण, तो कुछ लोग स्वास्थ्य कारणों या नौकरी छूटने की वजह से कुछ समय तक काम नहीं करते. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल होता है कि नौकरी छोड़ने के बाद EPF खाते में जमा पैसे का क्या होगा? क्या उस पर ब्याज मिलता रहेगा? क्या पूरा पैसा निकाल लेना चाहिए? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

अगर आपने नौकरी छोड़ दी है, तो आपका EPF खाता बंद नहीं होता. खाते में जमा पूरी रकम आपकी ही रहती है. अगर कुछ समय तक नई नौकरी नहीं मिलती और खाते में नई राशि जमा नहीं होती, तब भी पहले से जमा रकम पर EPFO तय नियमों के अनुसार ब्याज देता रहता है.
EPF पर कब तक मिलता रहेगा ब्याज?
EPFO के नियमों के अनुसार, अगर आपने नौकरी छोड़ दी है, तब भी 58 वर्ष की उम्र तक आपके EPF खाते में जमा राशि पर ब्याज मिलता रहेगा. हालांकि, अगर कोई व्यक्ति 55 वर्ष या उसके बाद नौकरी छोड़ता है, तो उसे अधिकतम 3 साल तक ही ब्याज मिलेगा. इसके बाद खाता निष्क्रिय माना जाएगा और उस पर ब्याज नहीं मिलेगा. फिलहाल वित्त वर्ष 202526 के लिए EPF पर 8.25% सालाना ब्याज तय किया गया है.
क्या करियर ब्रेक में EPF निकाल लेना सही रहेगा?
नए EPF नियमों के तहत, नौकरी छूटने के बाद कर्मचारी तुरंत अपने EPF बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. बाकी 25% रकम तभी निकाली जा सकती है, जब कर्मचारी लगातार 12 महीने तक बेरोजगार रहे. पहले के मुकाबले अब निकासी की रकम में कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता का योगदान और उस पर मिला ब्याज भी शामिल होता है.
जल्दी पैसा निकालने से हो सकता है नुकसान
अगर आप करियर ब्रेक के दौरान EPF का पैसा निकाल लेते हैं, तो भविष्य के रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा टैक्स का भी ध्यान रखना जरूरी है. अगर आपने लगातार 5 साल की नौकरी पूरी नहीं की है, तो EPF निकालने पर टैक्स देना पड़ सकता है. वहीं, अगर आपने कम से कम 5 साल की लगातार सेवा पूरी कर ली है और रिटायरमेंट, इस्तीफा, दिव्यांगता, कंपनी बंद होने या अन्य मान्य कारणों से पैसा निकालते हैं, तो पूरा EPF बैलेंस टैक्स फ्री रहता है.
अगर ब्याज या क्लेम में देरी हो तो क्या करें?
कई बार EPFO द्वारा जमा किया गया ब्याज पासबुक में दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है. लेकिन अगर आपका खाता नियमों के अनुसार सक्रिय है, तो ब्याज मिलता जरूर है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर आपने ऑनलाइन क्लेम किया है, तो आमतौर पर 7 से 10 दिन में उसका निपटारा कर दिया जाता है. इसके लिए KYC पूरी होना जरूरी है. अगर 20 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा नहीं होता, तो सदस्य EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. नए नियमों के अनुसार, अगर बिना उचित कारण के तय समय में क्लेम का निपटारा नहीं किया जाता, तो संबंधित अधिकारी पर 12% सालाना पेनल ब्याज भी लगाया जा सकता है.



