बारिश के मौसम में कार चलाना सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो जाता है. गीली और फिसलन भरी सड़कें दुर्घटना का खतरा बढ़ा देती है. ऐसे समय में लोग अक्सर वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच तो कर लेते हैं, लेकिन टायर प्रेशर पर ध्यान नहीं देते हैं. जबकि सेफ ड्राइविंग के लिए टायर में सही हवा होना बेहद जरूरी है. सही प्रेशर न होने पर कार की पकड़ कमजोर हो सकती है और ब्रेकिंग पर भी असर पड़ सकता है.

कितना होना चाहिए टायर प्रेशर?

बारिश हो या गर्मी, का प्रेशर हमेशा वहीं रखना चाहिए जो वाहन निर्माता कंपनी ने तय किया है. हर कार के लिए यह अलग होता है. इसकी जानकारी आपको ड्राइवर साइड के दरवाजे पर लगे स्टिकर या फिर कार की ओनर मैनुअल में आसानी से मिल जाएगी. मौसम बदलने पर अपनी तरफ से हवा कम या ज्यादा करना सही तरीका नहीं है.

ज्यादा हवा भरने से क्या होता है?

अगर टायर में जरूरत से ज्यादा हवा भर दी जाए, तो उसका सड़क से संपर्क कम हो जाता है. इसका असर कार की ग्रिप पर पड़ता है.बारिश में अचानक ब्रेक लगाने या तेज मोड़ लेने के दौरान कार फिसल सकती है. इसलिए हमेशा तय सीमा के अनुसार ही टायर में हवा भरवानी चाहिए.

कम हवा भी बन सकती है परेशानी

कुछ लोगों का मानना है कि में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ बेहतर हो जाती है, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. कम हवा होने से टायर जल्दी घिस सकते हैं, ईंधन की खपत बढ़ सकती है और लंबे सफर में टायर ज्यादा गर्म हो सकते हैं. इससे टायर के खराब होने या फटने का जोखिम भी बढ़ जाता है.

सिर्फ प्रेशर नहीं, टायर की स्थिति भी जांचें

बारिश के मौसम में टायर की ग्रिप और ट्रेड की गहराई भी बहुत अहम होती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर टायर का ट्रेड ज्यादा घिस चुका है, तो पानी वाली सड़क पर कार का नियंत्रण बिगड़ सकता है. ऐसे टायरों को समय रहते बदल देना बेहतर रहता है.

सुरक्षित सफर के लिए रखें ये बातें याद

हर महीने कम से कम एक बार टायर प्रेशर जरूर चेक कराएं. अगर लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं, तो सफर शुरू करने से पहले टायर की हवा और उसकी स्थिति दोनों की जांच करें. सही टायर प्रेशर और अच्छी हालत वाले टायर न सिर्फ आपकी कार की परफॉर्मेंस बेहतर बनाते हैं, बल्कि बारिश के मौसम में आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रखने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.