इस समय अक्सर लोग बुखार, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान की शिकायत करते हैं। अगर यह समस्या कई दिनों तक बनी रहती है या गंभीर हो रही है तो यह डेंगू या मच्छरों से होने वाली बीमारी की आशंका को बढ़ा सकती है।

मानसून का मौसम डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के लिए सबसे मुफीद होता है। यही कारण है कि इन दिनों बुखार, सिरदर्द, उल्टी, पेटदर्द जैसी शिकायतें लेकर अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या अधिक देखी जाती है।

संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए वैसे तो सतर्कता हर समय जरूरी है, पर इन दिनों जलजमाव, गंदगी के चलते बीमारियां अधिक होती हैं, इसलिए अधिक सतर्क होने की जरूरत होती है। जलभराव और गंदगी के कारण घनी आबादी वाले शहरों में जगहजगह डेंगू के हाटस्पाट बन जाते हैं।

हर साल इससे बचाव और उपचार के लिए प्रयास तो होते हैं, पर यह समस्या लगातार बनी हुई है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, बीते 50 वर्षों में डेंगू के मामलों में 30 गुणा तक वृद्धि हुई है, यह दुनिया 10 सबसे गंभीर स्वास्थ्य संकटों में से एक है। आज दुनिया की आधी आबादी इसके खतरे के साये में है।

चूंकि, अधिक तापमान और आद्रता वाले स्थानों पर एडीज मच्छर अधिक पनपते हैं, खासकर अधिक बारिश और लंबे मानसून के चलते मच्छरों का प्रजनन अधिक समय तक होता है, जिससे मच्छरजनित बीमारियां महीनों तक बनी रहती हैं।

मानसून में डेंगू बुखार

डेंगू वायरल संक्रमण है, जो मुख्यत: संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। कूलर, गमलों, पौधों, टायर्स और खराब पड़े कंटेनर्स और जलभराव के चलते एडीज मच्छर तेजी से पनपते हैं। ऐसे में बचाव का सबसे आसान उपाय यही है कि साफसफाई और सतर्कता बरतकर डेंगू की आशंका को कम किया जाए। ये मच्छर दिन के समय में सक्रिय रहते हैं, सुबह और दोपहर के बाद के समय में इनके काटने की आशंका सबसे अधिक रहती है।

हालांकि, मच्छरों से बचाव हर समय करना चाहिए, ताकि संक्रमण की आशंका न रहे। खास बात है कि डेंगू संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने, साथ में भोजन करने या संक्रमित व्यक्ति को छूने से नहीं फैलता। दरअसल, डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर संक्रमित हो जाता है और फिर वह वायरस को किसी दूसरे व्यक्ति में फैलाता है। इससे संक्रमण की सिलसिला शुरू हो जाता है।

डेंगू बुखार के लक्षण

कुछ लोगों में डेंगू के शुरुआती लक्षण नहीं होते, कुछ लोगों में इसके हल्के लक्षण हो सकते हैं। आराम करने, पर्याप्त पानी पीते रहने जैसे आसान उपायों से ज्यादातर लोग ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ ही मामलों में यह गंभीर रूप ले सकता है। इसके शुरुआती लक्षण:

  • अचानक बुखार
  • तेज सिरदर्द
  • आंखों में दर्द
  • मांसपेशियों, हड्डियों या जोड़ों में दर्द
  • थकान या कमजोरी
  • जी मिचलाना
  • डॉक्टर से मिलें अगर
  • पेट में तेज दर्द हो
  • लगातार उल्टी हो
  • नाक या मसूड़ों से खून निकल रहा हो
  • उल्टी या दस्त में खून आए
  • सांस लेने में तकलीफ हो
  • यूरिन कम, थकान बहुत अधिक हो
  • त्वचा पीली या ठंडा हो जाए

मानसून में डेंगू से ऐसे करें बचाव

  • मच्छरों से बचाव हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने चाहिए, ताकि हाथ और पैर पूरी तरह ढंकें हों। पूरी बांह की शर्ट, लंबे ट्राउजर्स, मोजे आदि पहनने से मच्छरों की काटने की आशंका कम रहती है। मच्छरों से बचाव के लिए अच्छे ब्रांड की रिप्लेंट का भी प्रयोग किया जा सकता है।
  • हर सप्ताह पानी की सफाई घर और आसपास में यह जरूर चेक करें कि कहीं पानी इकट्ठा तो नहीं हो रहा है। गमले की ट्रे और फूलदान, एयर कूलर, बाल्टियां, टब और ड्रम, पालतू जानवरों के पानी के कटोरे, रेफ्रिजरेटर की ड्रिप ट्रे, बर्ड बाथ, तिरपाल और प्लास्टिक की शीट, पुराने टायर, बोतलें, डिब्बे और नारियल के खोल, बालकनी और ड्रेन में पानी के जमाव को चेक करें। चूंकि, मच्छरों के अंडे कंटेनर की अंदरूनी दीवारों पर चिपके हो सकते हैं, इसलिए रगड़कर साफ करना जरूरी है।
  • सुरक्षा के उपाय खिड़कियों और दरवाजों पर जालीदार कवर लगवाएं। अगर कहीं छेद हो, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। दरवाजों को बंद करके रखें। बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल विशेष तौर पर करें।
  • आसपास सफाई का ध्यान डेंगू से तभी सुरक्षित रहेंगे, जब खुद के साथ आसपास की सफाई का भी ध्यान रखेंगे। जलभराव, नाली जाम होने या खुले में गंदगी इकट्ठा होने पर बीमारी की आशंका बढ़ती है। इसकी सफाई का इंतजाम करना चाहिए।

डेंगू में प्लेटलेट काउंट का महत्व

प्लेटलेट खून का थक्का जमने में मदद करते हैं। डेंगू की वजह से इनका काउंट कम हो सकता है, इसलिए डॉक्टर ‘कंप्लीट ब्लड काउंट’ टेस्ट के जरिये इसकी निगरानी करते हैं। हालांकि, प्लेटलेट काउंट जांच का सिर्फ एक हिस्सा है। इसके कम काउंट होने से डेंगू की पुष्टि नहीं होती, न ही इससे ब्लीडिंग का अंदाजा लगाया जा सकता है और न ही इसका मतलब यह है कि प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की जरूरत है।

डॉक्टर आपके लक्षणों, ब्लीडिंग, शरीर में पानी की मात्रा , ब्लड प्रेशर, हीमेटोक्रिट और टेस्ट के नतीजों में हो रहे बदलावों पर भी ध्यान देते हैं। एक रीडिंग के बजाय, समयसमय पर किए गए टेस्ट के नतीजे ज्यादा काम के हो सकते हैं। डॉक्टर द्वारा बताए गए टेस्टिंग शेड्यूल का पालन करना और अपनी रिपोर्ट की तुलना किसी और की रिपोर्ट से नहीं करनी चाहिए।

संभावित संक्रमण में क्या करें

  • अगर डेंगू के लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर से मिलकर जरूरी जांचें करा लेनी चाहिए।
  • आराम करना और पर्याप्त पानी पीना, ओरल हाइड्रेशन सोल्यूशन, सूप लाभदायक है।
  • बुखार और दर्द में इस्तेमाल होने वाले पैरासीटामोल का प्रयोग कर सकते हैं।
  • एस्पिरिन, आइब्रूफेन, डाइक्लोफिनैक जैसी दवाओं लेने से बचना चाहिए। इससे ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।
  • किसी भी तरह एंटीबायोटिक्स, स्टेरायड या प्लेटलेट बढ़ाने वाली दवा लेने से बचना चाहिए।
  • कोई भी दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
  • डेंगू होने पर मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें ताकि अन्य लोगों को संक्रमण न हो।

जांच, उपचार की सुविधाएं बढ़ीं, पर सतर्कता भी जरूरी

“बारिश और जलजमाव के चलते इन दिनों डेंगू के मामले स्वाभाविक तौर पर बढ़ने लगते हैं। रुके हुए पानी में डेंगू के मच्छर पनपते हैं। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, ब्लडप्रेशर है या जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें इस तरह संक्रमण से बचाव के लिए अधिक सतर्क होना चाहिए। क्योंकि, जो लोग पहले से बीमार हैं उनके अंगों की क्षमता कमजोर हो चुकी होती है, उन्हें संक्रमण होने पर वह अधिक गंभीर हो सकता है। बुजुर्गों और बच्चों को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत होती है। जल्द ही डेंगू वैक्सीन आने की संभावना है। यह बड़े स्तर पर बदलाव का कारण बनेगी। डेंगू के अलगअलग प्रकार होते हैं, इसलिए संक्रमण का प्रकार भी अलग हो सकता है। जहां तक गंभीरता की बात है तो 1999 में भी गंभीर मामले आते थे और अभी भी आते हैं। वायरस की गंभीरता और फैलाव के पीछे अनेक कारण जिम्मेदार होते हैं। सुविधाएं निस्संदेह बढ़ी हैं, लोगों को अब आसानी से प्लेटलेट्स, जांच और दवाओं को सुविधा मिल रही है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। दोतीन दशक पहले ये सुविधाएं केवल बड़े अस्पतालों और शहरों तक ही सीमित थीं, अब छोटे शहरों में भी उपलब्ध हैं। समय पर सही उपचार मिल जाए तो मरीज आसानी से रिकवर कर जाता है। स्थानीय निकायों की तरफ से साफ सफाई जरूरी है। साथ ही, व्यक्तिगत और परिवार के स्तर पर भी सतर्क रहना चाहिए। मुख्य बात यही है कि मच्छरों के काटने से बचना है। हमेशा ध्यान रखें कि अगर बुखार होता है तो पैरासीटामोल लें और पर्याप्त पानी पीते रहें। कोई भी दवा डॉक्टर के सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए। अगर बुखार के साथ उल्टी भी हो रही है तो बिना देर किए डॉक्टर से तुरंत मिलें।
डॉ. सुरनजीत चटर्जी, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली

जल्द ही उपलब्ध होगी डेंगू की वैक्सीन

भारत में पहली बार डेंगू की रोकथाम के लिए वैक्सीन को मंजूरी मिली है। टाकेडा बायोफार्मास्युटिकल्स की डेंगू वैक्सीन क्यूडेंगा जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो सकती है। पिछले दो दशकों में भारत में डेंगू के दर्ज मामलों में 11 गुणा वृद्धि हुई है। ऐसे में डेंगू की रोकथाम के लिए वैक्सीन एक कारगर उपाय साबित हो सकती है।

दुनिया के कुल डेंगू संक्रमण का एकतिहाई हिस्सा भारत में दर्ज होता है। ऐसे में हर स्तर पर प्रभावी उपाय करने की आ श्यकता है। क्यूडेंगा को डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। इसे चार से 60 वर्ष आयु के लोगों में लगाया जा सकता है, चाहे उन्हें पहले डेंगू संक्रमण हुआ हो या नहीं।

भारत में मंजूरी मिलने के साथ अब क्यूडेंगा को 43 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। वर्ष 2025 में भारत में डेंगू के 1.13 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए थे, हालांकि माडलिंग स्टडीज से संकेत मिलता है कि वास्तविक संक्रमणों की संख्या दर्ज मामलों से कहीं अधिक है और हर वर्ष संभवतः करोड़ों लोग इससे संक्रमित हो जाते हैं।