हम तनमन की तंदुरुस्ती के लिए हमेशा बाजार की तरफ क्यों भागते हैं, जब रसोई में ही मौजूद हैं सदियों पुराने सुपरफ़ूड्स।

पहले के समय में भारतीय रसोई केवल खाना पकाने की जगह नहीं थी, यह एक दवा खाना भी हुआ करती थी। घर में ही इतने देसी नुस्खे होते थे जो छोटीमोटी दिक्कतों को दूर कर देते थे। हम उन्हीं नुस्खों की बात कर रहे हैं जिन्हें दादीनानी के नुस्खे कहा जाता है। आज हम अपनी इम्युनिटी मजबूत करने के लिए विदेशी सप्लीमेंट्स और दवाओं पर निर्भर है, जबकि इलाज रसोई में रखी चीजों में ही छिपा है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आइए आपको बीमारियों से बचाने वाले उन प्राचीन भारतीय सुपरफूड्स के बारे में बताते हैं।
पंजीरी
आटे और मेवे से बनने वाली पंजीरी शरीर को तुरंत एनर्जी देने में मदद करती है। कई मामलों में इसे वजन कम करने के लिए भी बहतरीन विकल्प बताया जाता है। पंजीरी क्योंकि घी से बनती है तो यह पाचन से जुड़ी दिक्कतों खासकर कब्ज को भी दूर कर सकती है।
काढ़ा
तुलसी, अदरक, अजवाइन, काली मिर्च जैसी चीजों से बना काढ़ा मामूली खांसीजुकाम, गले में खराश को दूर करने के साथ ही पाचन ठीक रखने का काम करता है। वहीं, रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी अच्छी रखने के लिए भी आयुर्वेद में काढ़े के सेवन की सलाह दी जाती है। मॉनसून और सर्दियों के मौसम में इसे पीना फायदेमंद माना जाता है।
हरीरा
हरीरा डिलीवरी के बाद महिलाओं को दिया जाने वाला एक पारंपरिक सुपरफूड है। यह यूटरस को फिर से उसके पुरानी शेप देने के साथ ही शरीर में ऊर्जा भी देता है। इसमें खजूर, बादाम, मखाने, गुड़, जायफल पाउडर, इलायची पाउडर, अखरोट और नारियल जैसी चीजें मिलाकर तैयार किया जाता है।
च्यवनप्राश
आयुर्वेद में च्यवनप्राश के सेवन की सलाह दी गई है। यह औषधि बच्चों से बुजुर्गों तक, सभी की बीमारियों से रक्षा करती है। कहा जाता है कि च्यवनप्राश की खोज च्यवन नामक एक ऋषि ने कारवाई थी। यह उम्र कम करने की भी एक खास औषधि मानी जाती है। इसमें कई तरह के एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जिनजी मदद से त्वचा फ्री रैडिकल्स के नुकसान से रक्षा कर पाती है।
हल्दी दूध
गहरी और सुकून वाली नींद चाहिए हो, शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ानी हो, जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाना हो, सर्दीजुकाम से राहत पानी हो या अंदरूनी घाव को भरना हो, ये सभी काम हल्दी दूध कर सकता है। केवल जरूरत है अपनी डाइट में इसे शामिल किये जाने की।



