कार का सस्पेंशन सिस्टम सिर्फ आरामदायक सफर के लिए नहीं होता, बल्कि यह गाड़ी की सुरक्षा और कंट्रोल में भी अहम भूमिका निभाता है. यही सिस्टम खराब सड़कों पर झटकों को कम करता है, टायरों को सड़क से सही संपर्क में रखता है और मोड़ लेते समय कार को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है.

समय के साथ शॉक एब्जॉर्बर, स्प्रिंग्स, स्ट्रट्स और सस्पेंशन के दूसरे हिस्से घिसने लगते हैं. अगर इनकी समय पर जांच या मरम्मत न कराई जाए तो इसका असर कार की ब्रेकिंग, हैंडलिंग और टायर की उम्र पर पड़ सकता है. कई बार छोटी समस्या आगे चलकर बड़ी और महंगी खराबी में बदल जाती है. इसलिए इन संकेतों को पहचानना जरूरी है.
गाड़ी का ज्यादा उछलना
अगर आपकी कार गड्ढों, खराब सड़कों या स्पीड ब्रेकर से गुजरते समय जरूरत से ज्यादा उछलने लगे और अंदर बैठे लोगों को ज्यादा झटके महसूस हों, तो यह सस्पेंशन में समस्या का संकेत हो सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। खराब शॉक एब्जॉर्बर सड़क के झटकों को ठीक से कंट्रोल नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में कार की जांच करवाना बेहतर होता है.
टायर का असमान रूप से घिसना
सस्पेंशन खराब होने पर कार का वजन सही तरीके से चारों पहियों पर नहीं पड़ता. इससे टायर के कुछ हिस्से ज्यादा घिसने लगते हैं. अगर किसी टायर का एक किनारा ज्यादा खराब हो रहा है या घिसाव बराबर नहीं है, तो यह सस्पेंशन, व्हील अलाइनमेंट या बुशिंग की खराबी का संकेत हो सकता है.
चलाते समय अजीब आवाजें आना
अगर गाड़ी चलाते समय गड्ढों या स्पीड ब्रेकर पर खटखट, चरमराहट या तेज आवाज आने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह बॉल जॉइंट, कंट्रोल आर्म, स्वे बार लिंक या अन्य सस्पेंशन पार्ट्स में खराबी की वजह से हो सकता है.
कार का एक तरफ खिंचना
अगर सीधी सड़क पर चलते समय या ब्रेक लगाने पर कार बारबार एक तरफ जाने लगे, तो यह सस्पेंशन असंतुलन का संकेत हो सकता है. कमजोर स्प्रिंग या खराब स्ट्रट की वजह से कार का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे ड्राइविंग के दौरान खतरा बढ़ जाता है.
ऑयल लीकेज या पार्ट्स में नुकसान
शॉक एब्जॉर्बर से तेल निकलना, नीचे ग्रीस जमा होना या कोई पार्ट टूटा हुआ दिखाई देना सस्पेंशन खराब होने का साफ संकेत है. ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मैकेनिक से जांच करवानी चाहिए.
सस्पेंशन की समयसमय पर जांच कराने से न सिर्फ ड्राइविंग सुरक्षित रहती है, बल्कि बड़े खर्च से भी बचा जा सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, हर 10,000 से 15,000 किलोमीटर के बाद कार के सस्पेंशन सिस्टम की जांच कराना एक अच्छी आदत है.



