NTA Paper Leak Action: देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

इतना ही नहीं, जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी गई है, उनके खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी। सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और युवाओं का भरोसा वापस दिलाने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, जिसके बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।

NTA में बड़े बदलाव की तैयारी

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह कार्रवाई केवल अधिकारियों को हटाने तक सीमित नहीं है। सरकार NTA के पूरे ढांचे में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है, ताकि भविष्य में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो सके।

सूत्रों के अनुसार एजेंसी की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही के नियमों में भी बदलाव किए जाएंगे। मंत्रालय का मानना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रशासनिक सुधार के साथ सख्त कार्रवाई भी जरूरी है। आने वाले दिनों में इस दिशा में और फैसले लिए जा सकते हैं।

शिक्षा मंत्रालय में भी हुआ बड़ा फेरबदल

इस कार्रवाई से एक दिन पहले केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में भी बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए थे। 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं, मौजूदा सचिव विनीत जोशी को पंचायती राज मंत्रालय भेज दिया गया है।

इसके अलावा 1995 बैच के आईएएस अधिकारी टी.के. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव बनाया गया है। माना जा रहा है कि मंत्रालय में हुए ये बदलाव और NTA पर हुई कार्रवाई परीक्षा व्यवस्था में सुधार की व्यापक योजना का हिस्सा हैं।

पेपर लीक पर लगातार सख्त हो रही सरकार

पिछले चार दिनों में केंद्र सरकार ने पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार कई बड़े फैसले लिए हैं। 21 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक को “घोर पाप” बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया था। 23 जुलाई को उन्होंने पेपर लीक मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की।

इसके बाद 24 जुलाई को सख्त कानून लाने का ऐलान किया गया। अब NTA के 47 अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई को इसी अभियान की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

युवाओं का भरोसा लौटाने की कोशिश

देशभर में नीट समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बाद लाखों छात्र परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे थे। ऐसे समय में सरकार की ओर से उठाए गए इन कदमों को परीक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की कोशिश माना जा रहा है।

शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में एजेंसी की कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जा सकें। सरकार का दावा है कि सुधारों के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और परीक्षा प्रणाली को पहले से अधिक भरोसेमंद बनाया जाएगा।