अगले मेगा ऑक्शन से पहले IPL फ्रेंचाइजी एक महंगी ‘रिटेंशन लड़ाई’ की ओर बढ़ सकती हैं, क्योंकि लीग के कुछ बड़े खिलाड़ी अपनी मौजूदा टीमों के साथ बने रहने के लिए 40 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट की मांग कर रहे हैं। अगर खिलाड़ी अपनी इस मांग पर अड़े रहते हैं, तो फ्रेंचाइजी को अगले ऑक्शन के लिए अपनी टीम बनाने की रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। क्रिकबज के अनुसार, कम से कम दो प्रमुख खिलाड़ियों ने अपनीअपनी फ्रेंचाइजी को बता दिया है कि वे रिटेंशन के लिए 40 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं। अन्य बड़े खिलाड़ी भी ऐसी ही मांग कर सकते हैं, खासकर अगर उन्हें लगता है कि ऑक्शन में उन्हें इससे बेहतर आर्थिक मौका मिल सकता है। एक मामले में, यह भी माना जा रहा है कि इस रकम का संबंध कप्तानी की भूमिका से है।

गौरतलब है कि इतने महंगे सौदों की यह स्थिति 2025 के मेगा ऑक्शन के दौरान बनी, जब श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत ने रिटेंशन के जरिए अपनी पुरानी फ्रेंचाइजी के साथ बने न रहने का फैसला किया। इसके बाद, दोनों खिलाड़ियों के लिए भारीभरकम बोलियां लगीं; अय्यर को 26.75 करोड़ रुपये मिले, जबकि पंत को 27 करोड़ रुपये की रकम हासिल हुई। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगले मेगा ऑक्शन में वित्तीय परिदृश्य कुछ अलग हो सकता है। 2027 सीजन के लिए मौजूदा पर्स 130 करोड़ रुपये है, जबकि अगले चक्र में इसके बढ़कर लगभग 150 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर अभी तक कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है।

40 करोड़ रुपये का एक कॉन्ट्रैक्ट किसी फ्रेंचाइजी के अनुमानित पर्स का 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ले लेगा, जिससे उन टीमों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं जो अपने कई स्थापित खिलाड़ियों को रिटेन करना चाहती हैं। रिटेंशन के नियम भी बातचीत पर असर डालेंगे। पिछले मेगा ऑक्शन के दौरान, BCCI ने 18 करोड़, 14 करोड़ और 11 करोड़ रुपये के स्लैब तय किए थे। टीमें वास्तविक भुगतान की घोषणा करके इन तय रकम से ज्यादा खर्च कर सकती थीं। पिछली व्यवस्था के तहत, पांच खिलाड़ियों को रिटेन करने पर पर्स से कम से कम 75 करोड़ रुपये कटते थे; और अगर खिलाड़ियों को दिया जाने वाला कुल भुगतान इस आंकड़े से ज्यादा होता, तो पर्स से और भी बड़ी रकम कट जाती।

पिछले ऑक्शन से पहले एक और प्रस्ताव भी सामने आया था, जिसमें डायरेक्ट रिटेंशन को खत्म करके पूरी तरह से ‘राइट टू मैच’ कार्ड पर निर्भर रहने की बात कही गई थी। हालांकि, इस बात की चिंता बनी रही कि ऐसी व्यवस्था में ऑक्शन के दौरान खिलाड़ियों की बोली बहुत ज्यादा बढ़ सकती है।